राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र का भवन जर्जर; टपक रहा पानी, नृत्याभ्यास प्रभावित

भास्कर न्यूज| सरायकेला विश्व धरोहर में शामिल सरायकेला का छऊ नृत्य आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है। यूनेस्को द्वारा इनटेंजिबल हेरिटेज का दर्जा प्राप्त यह पारंपरिक नृत्य अपनी जन्मस्थली पर ही बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। सरायकेला स्थित राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र भवन की जर्जर स्थिति और लगातार टपकते पानी के कारण कलाकारों का नृत्य अभ्यास प्रभावित हो गया है। कला केंद्र के मुख्य भवन, नृत्य स्टेज, ग्रीन रूम और निदेशक कक्ष की छत से पानी टपक रहा है, जिससे अभ्यास के दौरान कलाकारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिसर में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के समय पूरा क्षेत्र पानी से भर जाता है और लोगों को ईंट पर पैर रखकर गुजरना पड़ता है। बताया गया है कि भवन रिनोवेशन कार्य के लिए संविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है, लेकिन अब तक संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। वहीं नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कला केंद्र का पूरा परिसर जर्जर अवस्था में है और यहां कभी भी दुर्घटना हो सकती है। बाहर का परिसर जंगल बन चुका है और जगह-जगह तालाब बन गए हैं। उन्होंने नगर पंचायत को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह संस्था केवल टैक्स वसूली तक सीमित रह गई है। जबकि नगरवासियों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। पूर्व उपाध्यक्ष मनोज चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि कला केंद्र के जर्जर भवन की मरम्मत के लिए संवेदक का चयन हो चुका है, फिर भी कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सका है, जो गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान सरायकेला की पहचान है, यहां के कलाकार विश्वभर में छऊ नृत्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि जल्द मरम्मत कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा और इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

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