राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय में सोमवार दोपहर 3 बजे सड़क सुरक्षा को लेकर एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन को सड़क दुर्घटनाओं से बचाव, सुरक्षित यातायात व्यवहार और आपात स्थिति में जीवन रक्षक उपायों की जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में परिवहन, यातायात और चिकित्सा विभाग से जुड़े अधिकारियों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और नशे की हालत में वाहन न चलाने की सलाह दी गई। मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए वाहन चलाने से होने वाले खतरों पर भी विशेष रूप से ध्यान दिलाया गया। पैदल यात्रियों को ज़ेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग करने और यातायात संकेतों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। लापरवाही दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण वक्ताओं ने बताया कि अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं तेज गति, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। उन्होंने समझाया कि थोड़ी सी सतर्कता और नियमों का पालन कर कई जानलेवा दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। दोपहिया वाहन चलाते समय चालक के साथ पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य होने की जानकारी दी गई। सीपीआर और प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला में चिकित्सा विभाग की टीम ने सीपीआर प्रशिक्षण के तहत आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को प्राथमिक सहायता देने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। सांस रुकने या हृदय गति बंद होने की स्थिति में तुरंत किए जाने वाले जीवन रक्षक उपायों को विस्तार से समझाया गया। इसके साथ ही एम्बुलेंस को समय पर सूचना देने और घायल को सुरक्षित अवस्था में रखने की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी गई। यातायात नियमों की पालना की दिलाई शपथ कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने सड़क सुरक्षा नियमों का स्वयं पालन करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इस अवसर पर परिवहन निरीक्षक दुर्गा शंकर जाट, यातायात प्रभारी ईश्वरलाल, चिकित्सा विभाग की टीम और नर्सिंग महाविद्यालय के विद्यार्थी मौजूद रहे।


