झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खोखंदा ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों को लेकर बनी धारणा को बदल रहा है। इस विद्यालय के ‘सुपर थर्टी’ कार्यक्रम के तहत चयनित 30 होनहार विद्यार्थी सामान्य ज्ञान में शहरी छात्रों को भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। खोखंदा गांव में न तो कोई बड़ा सरकारी आवागमन का साधन है और न ही पक्की सड़कें। चारों ओर घना जंगल और सीमित संसाधनों के बावजूद, विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रेम दाधीच ने शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है। विद्यालय में कुल 150 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से कक्षा तीसरी से आठवीं तक के 30 विद्यार्थियों को ‘सुपर थर्टी’ के लिए चुना गया है। ये छात्र न केवल अपनी कक्षा की पढ़ाई में अव्वल हैं, बल्कि सामान्य ज्ञान में भी उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। जब भी कोई अधिकारी या शिक्षा विभाग का प्रतिनिधि विद्यालय का निरीक्षण करने आता है, तो इन बच्चों का ज्ञान देखकर आश्चर्यचकित रह जाता है। ये विद्यार्थी विश्व के देश और उनकी राजधानियां, नए आविष्कार, प्रसिद्ध पुस्तकें और उनके लेखक, राष्ट्रीय व राज्य प्रतीक, तथा जिले और उनकी राजधानियां बिना रुके फर्राटेदार तरीके से बताते हैं। इतना ही नहीं, किसी भी तारीख का दिन निकालना भी इनके लिए आसान है। यह उपलब्धि नियमित अभ्यास, विशेष कक्षाओं और प्रार्थना सभा में दिए जाने वाले सतत प्रशिक्षण के कारण संभव हो पाई है। प्रधानाध्यापक प्रेम दाधीच का यह प्रयास दर्शाता है कि सकारात्मक सोच और सच्ची मेहनत से संसाधनों की कमी भी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बन सकती। खोखंदा का यह विद्यालय आज न केवल गांव, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।


