मध्य प्रदेश में शीतलहर का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। रात के साथ दिन भी सर्द बने हुए हैं। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाई गई हैं, वहीं कुछ जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदली गई है। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार–मंगलवार की दरमियानी रात राजगढ़ में न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। इसके अलावा रीवा में 4 डिग्री, खजुराहो में 4.4, उमरिया में 4.6 और मंडला में 4.9 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। दिन का तापमान भी सामान्य से नीचे
मंगलवार को दतिया में दिन का तापमान सबसे कम 17.6 डिग्री रहा। श्योपुर में 18.2, नौगांव में 18.5, ग्वालियर में 18.9, खजुराहो में 20.4, रीवा-टीकमगढ़ में 20.6, नरसिंहपुर-मलाजखंड में 21, पचमढ़ी-सीधी में 21.6, भोपाल-दमोह में 21.8 और रतलाम-गुना में 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल सबसे ठंडा बड़ा शहर
भोपाल में एक ही रात में तापमान 5.6 डिग्री गिरकर 3.8 डिग्री पहुंच गया। बड़े शहरों में भोपाल सबसे ठंडा रहा। इंदौर में 8.6, ग्वालियर में 7.3, उज्जैन और जबलपुर में 7.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। घना कोहरा, विजिबिलिटी 50 मीटर से कम
दतिया में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रही। ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, रतलाम, छिंदवाड़ा समेत कई जिले कोहरे की चपेट में रहे। देखिए, एमपी के मौसम की तस्वीरें इन 24 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित 7 जिलों में बदली स्कूलों की टाइमिंग कुछ जिलों में स्कूल पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं, बल्कि क्लास की टाइमिंग बदली गई है— इटारसी आने वाली ट्रेनें 14 घंटे तक लेट
घने कोहरे के कारण इटारसी में उत्तर भारत से आने वाली कुछ ट्रेनें 14 घंटे देरी से पहुंची। सुबह आने वाली ट्रेनें रात में और रात की ट्रेनें सुबह आ रही हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन पर इंतजार कर रहे यात्रियों का कहना है कि अनिश्चित देरी से उनकी आगे की यात्रा और जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव, चाय और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। प्लेटफार्मों पर देर रात तक भीड़ बनी हुई है। देखिए कौन सी ट्रेन कितनी लेट रही इस बार कड़ाके की ठंड का दौर
इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। मौसम विभाग ने नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ने का अनुमान जताया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। ठंड के लिए इसलिए खास जनवरी
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिल बादल भी छाए रहे। MP के 5 बड़े शहरों में जनवरी में ऐसा रहा सर्दी का ट्रेंड… भोपाल में 0.6 डिग्री पहुंच चुका टेम्परेचर
भोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। वहीं, दिन में गर्मी का एहसास और बारिश का ट्रेंड भी है। 18 जनवरी 1935 को रात का टेम्परेचर रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं, 26 जनवरी 2009 को दिन में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 में से 7 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी। वहीं, सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच बारिश जनवरी 1948 में हुई थी। इंदौर में माइनस 1.1 डिग्री पहुंच चुका पारा
इंदौर में जनवरी में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 में पारा माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 27 जनवरी 1990 को दिन का तापमान 33.9 डिग्री रहा था।
24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है। इस दिन 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, वर्ष 1920 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4 इंच दर्ज की गई थी। जबलपुर में 1946 में रिकॉर्ड 1.1 डिग्री रहा था पारा
जबलपुर में भी जनवरी में ठंड-बारिश का ट्रेंड है। इस महीने सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम तापमान 33.4 डिग्री 7 जनवरी 1973 को रहा था। इस महीने बारिश भी होती है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 24 जनवरी 1919 को 2.5 इंच हुई थी। इसी साल पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। उत्तरी हवा आने से ग्वालियर सबसे ठंडा
उत्तरी हवाओं की वजह से प्रदेश का ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा रहता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री रहा था। ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती है। साल 2014 से 2024 के बीच 9 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 को है। इस दिन 2.1 इंच पानी गिरा था। वहीं, 1948 को कुल मासिक बारिश 3.1 इंच हुई थी। उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पारा
उज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्प्रेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी। मिनट टु मिनट अपडेट के लिए यहां से गुजर जाइए…


