राजनांदगांव जिले के ओस्तवाल लाइन स्थित उपहार साड़ी में मुमुक्षु आगम सुराणा का बहुमान किया गया। इस कार्यक्रम में महापौर मधुसूदन यादव भी शामिल हुए, जिनका भी सम्मान किया गया। आगम सुराणा ने मात्र 15 वर्ष की आयु में संयम पथ पर चलने का निर्णय लिया है। महापौर मधुसूदन यादव ने कहा कि आज भगवान विश्वकर्मा का जन्मदिन है, जो सृजन के देवता हैं। उन्होंने आगम सुराणा को भी सृजन के मार्ग पर चलने वाला बताया और उनके संयमी जीवन में सफलता की कामना की। जैन समाज के भागचंद गीड़िया ने आगम सुराणा के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर आध्यात्मिकता का मार्ग चुनना प्रेरणादायक है। उन्होंने आगम की माता शीतल सुराणा और पिता जय सुराणा की भी अनुमोदना की, जिन्होंने अपने पुत्र को संयम मार्ग पर चलने की स्वीकृति दी। बहुमान सभा में माही शैलेश सुराणा ने आगम सुराणा का जीवन परिचय दिया। उन्होंने बताया कि आगम का जन्म 6 मई 2010 को दुर्ग में हुआ था। उनके दादा चंद्रकांत सुराणा हैं। आगम बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं। सभा का संचालन करते हुए आशीष बैद ने बताया कि आचार्य श्री रामलाल जी और आगम के दादा चंद्रकांत सुराणा दोनों का जन्म देशनोक (राजस्थान) में हुआ है। आगम के जन्म के 12 साल बाद, वर्ष 2022 में दुर्ग में हर्षित मुनि जी का चातुर्मास हुआ था, जिससे आगम प्रभावित होकर उनके संपर्क में आए थे। आगम ने स्वयं बताया कि वे आचार्य रामलाल जी और उपाध्याय राजेश मुनि जी से काफी प्रभावित हैं।कार्यक्रम की शुरुआत मुमुक्षु आगम सुराणा द्वारा मंगलाचरण से हुई। आगम सुराणा की मौसी सरिता शैलेश सुराणा ने एक गीतिका प्रस्तुत की। आगम ने यह भी बताया कि उनके मौसा शैलेश सुराणा और मौसी सरिता सुराणा भी उनके इस निर्णय का समर्थन करते हैं।


