चुनाव आयोग ने मंगलवार को प्रदेश के राजनीतिक दलों के साथ एसआईआर के प्रोविजनल ड्राफ्ट को लेकर बैठक की। इस बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एसआईआर का ड्राफ्ट साझा किया। सभी पार्टियों को सीडी में इसकी जानकारी दी गई। भाजपा की ओर से विधायक भगवानदास सबनानी, कांग्रेस की ओर से जेपी धनोपिया, ललित सेन व आप पार्टी से सीपी सिंह चौहान शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से धनोपिया ने एसआईआर में अनमैप्ड मतदाताओं को शामिल करने पर आपत्ति जताई और बूथवार इनकी डिटेल उपलब्ध कराने की मांग रखी। आयोग ने बताया कि जिनके फॉर्म में त्रुटिपूर्ण या अधूरी जानकारी है, उन्हें अनमैप्ड कैटेगरी में रखा है, यदि यह पूरी जानकारी दे देंगे, तो उनके नाम नहीं हटाए जाएंगे। वहीं भाजपा की ओर से भगवानदास सबनानी ने एबसेंट, रिपीटेड, अनमैप्ड और डेथ वाले मतदाताओं की बूथवार डिटेल उपलब्ध कराने की मांग रखी। आयोग ने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को आश्वस्त किया अनमैप्ड मतदाताओं की विधानसभावार जानकारी दी जाएगी। अभी जो ड्राफ्ट जारी हुआ है, उसमें अनमैप्ड मतदाताओं को सामान्य के साथ ही रखा है, इस कारण इन्हें पहचान पाना मुश्किल है। चुनाव आयोग की ओर से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव, सुरभि तिवारी, राजेश यादव शामिल हुए। मप्र में बने 6916 नए बूथ, कुल संख्या हुई 71930 एसआईआर के पहला चरण पूरा होने के बाद प्रदेश में 6916 नए बूथ बनाए गए हैं। 1200 से अधिक वोटर्स होने के कारण 6704 नए बूथ बनाए गए हैं, जबकि 2 किलोमीटर से अधिक दूरी नहीं होने के मापदंड के कारण 230 नए बूथ बनाए गए हैं। वहीं पूर्व से बने 18 बूथ को विलोपित कर दिया गया है। एसआईआर से पहले प्रदेश में कुल 65014 बूथ थे, जो अब बढ़कर 71930 हो गए हैं। राजनीति दलों ने इन बूथों की जानकारी भी मांगी है। भाजपा की ओर से भगवानदास सबनानी ने मांग की कि जिन बूथों को तोड़कर नए बूथ बनाए गए हैं, उनके बारे में राजनीतिक दलों को अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। मतदाताओं को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में मतदाता किस बूथ पर व किस बीएलओ से संपर्क करें, यह जल्द से जल्द स्पष्ट किया जाए। ^ऐसे सभी मतदाताओं को आयोग की ओर से एक मौका और दिया जाएगा, जिनका नाम सूची से काटने की स्थिति बनी है या किसी कारण से छूट गया है। ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना जाएगा, दस्तावेज मांगे जाएंगे। जो सही जानकारी उपलब्ध कराएंगे, उनके नाम फिर से जोड़े जा सकेंगे। जो सही जानकारी नहीं देंगे उनके नाम स्थाई रूप से काट दिए जाएंगे।
– संजीव कुमार झा, सीईओ मप्र केंद्रीय निर्वाचन आयोग


