लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में लव जिहाद और धर्मांतरण के आरोपों से जुड़ा मामला हाई वोल्टेज ड्रामा में बदल गया है। KGMU में शुक्रवार को दिनभर चले हंगामे के बाद शाम को लखनऊ पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया। इस बीच शाम तक इस पूरे मामले पर KGMU की तरफ से चौक थाने में तहरीर भी दे दी गई। वहीं, रात में अपर्णा यादव की CM से मुलाकात की तस्वीर भी सामने आ गई। कहा गया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से उन्हें तलब किया गया था। बहरहाल, राजभवन और सीएम कार्यालय तक पूरा मामला पहुंचने के बाद आज (शनिवार को) फिर से दोनों पक्ष की तरफ से जोर आजमाइश देखी जा सकती है। कुलपति की तरफ से कुलाधिपति यानी गवर्नर कार्यालय से भेंट के लिए समय मांगा गया है। आज यह भेंट होने की संभावना है। इसके अलावा डिप्टी सीएम और चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक से पूरे मामले की शिकायत के बाद अब KGMU के डॉक्टरों की आक्रोश बढ़ता दिख रहा है। KGMU का दावा- बिना किसी पूर्व सूचना के मिलने पहुंचीं अपर्णा यादव KGMU प्रशासन की तरफ से चीफ प्रॉक्टर ने अपर्णा यादव और उनके समर्थकों का उल्लेख करते हुए FIR दर्ज करने की तहरीर दी है। इसमें कहा गया कि आरोपी सीनियर रेजिडेंट डॉ. रमीजुद्दीन नायक (उर्फ रमीज मलिक) के मामले में गंभीरता से विशाखा कमेटी को जांच सौंपी गई, 15 दिन में रिपोर्ट भी आई, जिसपर कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने आरोपी का दाखिला रद्द करने का फैसला लिया गया। इसके बाद कुलपति के चैंबर के बाहर अचानक भीड़ जमा होने लगी। अपर्णा यादव बिना किसी पूर्व सूचना के अपने समर्थकों के साथ परिसर में दाखिल हो गई। फिर भी कुलपति ने उन्हें अकेले चैंबर में मिलने को कहा, लेकिन वह अपने 200 समर्थकों के साथ मिलने पर अड़ी रहीं। कुलपति कार्यालय में की गई तोड़-फोड़ KGMU प्रशासन का आरोप है कि इस दौरान भीड़ जबरन कुलपति के कार्यालय में घुस गई। प्रशासनिक कक्षों पर कब्जा कर लिया गया और तोड़-फोड़ के साथ नारेबाजी शुरू कर दी। गंभीर स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने कुलपति को सही सलामत सुरक्षित स्थान पर पहुंचा और राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत उपमुख्यमंत्री कार्यालय को जानकारी दी गई। इसके बाद परिसर में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर भीड़ पर काबू पाया गया। लेकिन इससे परिसर में चल रही परीक्षा भी बाधित हुई। KGMU का कहना है कि अगर अपर्णा यादव को विशाखा कमेटी पर चर्चा करनी थी तो उन्होंने इसकी पहले सूचना क्यों नहीं दी। FIR दर्ज न होने पर बढ़ेगा आक्रोश KGMU के डीन पैरामेडिक्स और प्रवक्ता डॉ.केके सिंह ने बताया कि चीफ प्रॉक्टर प्रो.आरएएस कुशवाहा की तरफ से चौक थाना प्रभारी को तहरीर दी गई है। यदि उस पर कोई कार्रवाई न हुई तो आहत डॉक्टर्स कठोर कदम उठाने पर बाध्य होंगे। तहरीर में महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के साथ आई भीड़ के द्वारा सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करना, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाना, महिला शिक्षकों के साथ अभद्रता करना, छात्रों की परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न करना और परिसर में भय का माहौल उत्पन्न करने की घटना की FIR दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की गई। इस वजह से आमने-सामने हुए KGMU-अपर्णा यादव एक तरफ KGMU प्रशासन का दावा है कि घटना सामने आने के बाद जांच शुरू होने के महज 15 दिन के भीतर ही आरोपी को दोषी करार देकर सबसे कठोरतम कार्रवाई यानी निष्कासन की कार्रवाई की गईं। DGME को रमीजुद्दीन नाइक की बर्खास्तगी के लिए विशाखा कमेटी के आधार पर पत्र भी लिखा जा चुका है। बावजूद इसके पूरे KGMU प्रशासन को कटघरे में खड़ा करना गलत है। वहीं, दूसरी तरफ, अपर्णा यादव की दलील है कि इस मामले में आरोपी को बचाने का भरसक प्रयास किया गया। जांच के लिए बनाई गई विशाखा कमेटी में भी दो सदस्य गंभीर मामलों के आरोपी है। कमेटी द्वारा दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय पीड़िता पर महिला आयोग जाने को लेकर सवाल पूछे गए। इसके अलावा अपर्णा यादव का ये भी कहना था कि कई अन्य मामलों में भी KGMU की विशाखा कमेटी दोषियों का बचाव कर रही है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की एक महिला प्रोफेसर और इसी विभाग के एक पुरुष फैकल्टी के बीच हुए विवाद का भी उन्होंने जिक्र किया। —————————– खबर ये है, पढ़िए… KGMU विवाद पर सीएम योगी से मिलीं अपर्णा यादव : प्रॉक्टर ने उनके खिलाफ थाने में दी शिकायत, यूनिवर्सिटी में समर्थकों ने किया था हंगामा लखनऊ में महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने शुक्रवार को सीएम योगी से मुलाकात कर KGMU लव जिहाद प्रकरण की जानकारी दी। वहीं KGMU प्रशासन ने अपर्णा यादव समेत उनके समर्थकों के खिलाफ KGMU में उत्पात मचाने की शिकायत चौक थाने में देकर FIR दर्ज करने की मांग की। (पूरा मामला पढ़िए)


