रांची | राजयोग आरोग्य का मूल आधार है। शरीर के रोग का मूल कारण मन की स्थिति है। मन के उदास व हतास हो जाने से पूरे शरीर में दुर्बलता दिखाई देती है। मन में यदि सदविचार की सद्भावना हो तो गमों के दौर में भी आदमी मुस्कुरा के जी लेता है और प्रभु स्मरण से फिर अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त कर लेता है। ये बातें विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सोमवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित सुस्वास्थ्य जीवन के लिए राजयोग कार्यक्रम में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कही। उन्होंने कहा कि जीवन में थोड़ा तनाव आवश्यक है, नहीं तो आदमी कर्म करना ही छोड़ देंगे। तनाव मुक्त जीवन ही अधिक कार्यशील होता है। भगवान ने मनुष्य शरीर को एक कलाकार की भांति बनाया है। मनुष्य की चेहरे पर चिंता की लकीरें अच्छी नहीं लगती है। भगवान अब भाग्य की लकीरे खींचने धरा पर आए हैं और मानव को राजयोग की औषधि द्वारा संपूर्ण निरोगी बना रहे हैं। अब वहीं समय आने वाला है जब हम सब संपूर्ण स्वास्थ्य और सुखी होंगे।


