राजसमंद में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर एक अभियान के तहत कलेक्टरी पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद अरावली क्षेत्र के बड़े हिस्से के संरक्षण से बाहर होने की आशंका जताई गई है। अखिल भारत हिन्दू क्रांति सेना के बैनर तले “अरावली बचाओ देश बचाओ” अभियान के तहत गुंजोल से कलेक्टरी तक वाहन रैली निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पर्यावरण से जुड़े लोग शामिल हुए। कलेक्टरी परिसर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने अरावली संरक्षण की मांग को लेकर नारे लगाए और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर जताई चिंता ज्ञापन में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के अनुसार अब केवल 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पर्वत श्रृंखलाओं को ही “अरावली हिल” की श्रेणी में रखा गया है। इस परिभाषा के चलते अरावली का लगभग 91.3% क्षेत्र संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकता है। खनन और निर्माण बढ़ने की आशंका प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि यह क्षेत्र संरक्षण से बाहर हुआ तो खनन, निर्माण और व्यवसायिक गतिविधियों का दबाव बढ़ेगा, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। भूजल और जैव विविधता पर खतरे की चेतावनी प्रदर्शन में कहा गया कि अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जीवनरेखा है। यह मरुस्थलीकरण रोकने, भूजल संरक्षण, जैव विविधता को बचाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पर्यावरणविदों की चिंता का हवाला देते हुए ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति से भूजल स्तर गिर सकता है, वन्यजीवों के आवास प्रभावित होंगे और तापमान में वृद्धि जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।


