भास्कर न्यूज | नागौर मोट्यार परिषद ने राजस्थानी भाषा को प्रदेश की दूसरी राजभाषा बनाने की मांग की है। महामंत्री प्रहलाद सिंह झोरड़ा ने बताया कि उप मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस बजट मेंमांग पूरी करने को लिखा है। आजादी के 8 दशकबाद भी राजस्थानी भाषा प्रदेश में उपेक्षा की शिकार है। इस बजट में यदि राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने की घोषणा होती है, तो प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे तथा राजस्थान की भाषा और संस्कृति जीवित रह सकेगी। अन्यथा एक समृद्ध भाषा अपना अस्तित्व खो देगी। जिससे राजस्थान के इतिहास, कला, संस्कृति और साहित्य को अपूरणीय क्षति होगी। झोरड़ा ने अपने पत्र में राजभाषा बनाने की घोषणा के अलावा राजस्थानी भाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को प्रदेश में मातृभाषा राजस्थानी दिवस घोषित करने, स्कूल, कॉलेजों में राजस्थानी साहित्य के व्याख्याताओं के पद भरने, साहित्य विषय खुलवाने, नवीन पद स्वीकृत करने और प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा और साहित्य को शामिल करने की मांग की है।


