द लीला पैलेस जयपुर ने अपने प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट मोहन महल को नए स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए ‘जामावर’ की शुरुआत की है। यह द लीला का सिग्नेचर इंडियन फाइन डाइनिंग कॉन्सेप्ट है, जो राजस्थान की शाही पाक परंपराओं और भारतीय विलासिता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। ‘जामावर’ नाम 16वीं सदी की कश्मीर की प्रसिद्ध जामावर शॉलों से प्रेरित है, जो अपनी जटिल बुनाई और शाश्वत सौंदर्य के लिए जानी जाती हैं। इसी तरह रेस्टोरेंट के व्यंजन और डिजाइन में भी शिल्पकला और भव्यता का अनुभव झलकता है। मोहन महल की विरासत को बरकरार रखते हुए इसमें 3.5 लाख से अधिक हाथ से तराशे गए ठीकरी दर्पण और 18 कैरेट गोल्ड लीफ वर्क की सजावट जोड़ी गई है। हर शाम लाइव इंस्ट्रूमेंटल परफॉर्मेंस यहां शाही दरबारों की भव्यता का अनुभव कराती है। रेस्टोरेंट में गुच्छी मटर मसाला, कोफ्ता-ए-जामावर, दाल-ए-जामावर और गोश्त की गलौटी जैसे विशेष व्यंजन परोसे जाएंगे। मेन्यू की प्रेरणा मुगलकालीन इनले क्राफ्ट ‘पर्चिनकारी’ से ली गई है। साथ ही, पारंपरिक शाही भोजन परंपरा के तहत हाथ धोने की रस्म से हर डाइनिंग अनुभव की शुरुआत की जाएगी। इस विशेष कॉन्सेप्ट को और भी अनोखा बनाती यह बात कि जामावर जयपुर का संचालन पूरी तरह से महिलाओं की टीम द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही एक विशेष बेवरेज प्रोग्राम भी पेश किया गया है, जिसमें पारंपरिक रेसिपी को आधुनिक मिक्सोलॉजी और वर्ल्ड-क्लास वाइन एवं कॉकटेल्स के साथ जोड़ा गया है। द लीला पैलेस जयपुर के वाइस प्रेसिडेंट और जीएम अनूप पांडे ने कहा कि मोहन महल का जामावर में रूपांतरण हमारी विरासत को नमन है। हम जयपुर को ऐसा अनुभव दे रहे हैं, जिसमें हर व्यंजन और हर विस्तार भारतीय लग्जरी और शाही अंदाज को आत्मसात करता है। जयपुर में ‘जामावर’ की शुरुआत न केवल मोहन महल की विरासत का विस्तार है, बल्कि शहर में फाइन डाइनिंग के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करने की ओर कदम भी है।


