राजस्थान के भारतीय सेना के जवान लद्दाख के द्रास ग्लेशियर में पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान पैर फिसलने से शहीद हो गए। चूरू के सतीश कुमार स्वामी 5 (GR) गोरखा राइफल रेजिमेंट (फ्रंटियर फोर्स) में नायक की पोस्ट पर थे। उनकी पार्थिव देह मंगलवार (21 जनवरी) को सादुलपुर पहुंची। यहां से उनके पैतृक गांव ठिमाऊ बड़ी तक तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद गांव में ही सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार सतीश (24) की शहादत की अब तक उनकी मां को जानकारी नहीं दी गई है। 17 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकलेगी मंगलवार सुबह करीब 8 बजे जवान की पार्थिव देह बीकानेर एयरपोर्ट से सादुलपुर के शहीद स्मारक एंबुलेंस से लायी गई। शहादत की सूचना के बाद से जिला प्रशासन की ओर से तिरंगा यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। अधिकारियों के अनुसार तिरंगा यात्रा दोपहर 12 बजे शुरू हो सकती है। करीब 17 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण से दूसरे लोग शामिल होंगे। रास्ते में तिरंगा यात्रा पर फूल बरसाने व शहीद को नमन करने के लिए भी बड़े पैमाने पर इंतजाम किए गए हैं। पिता और भाई को दी गई है जानकारी फिलहाल परिवार में पिता और भाई को शहादत की सूचना दी गई है, मां सुमित्रा देवी को इसकी जानकारी नहीं है। गांव के लोग घर की ओर किसी को जाने नहीं दे रहे हैं। वहीं, मंगलवार सुबह करीब 10 बजे शहीद के पिता और भाई राजगढ़ शहीद स्मारक के लिए घर से रवाना हुए। इधर, पैतृक गांव में शहीद के अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। शहीद सुभाष चंद्र राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल के सामने अंत्येष्टि स्थल पर सफाई कार्य में लोग जुटे हुए हैं। 5 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे सतीश शहीद के चचेरे भाई प्रमोद स्वामी ने बताया कि सतीश के पिता बुद्धराज स्वामी उदयपुर सिटी पैलेस में जॉब करते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से घर पर ही हैं। मां सुमित्रा देवी गांव में ही आंगनबाड़ी केंद्र पर काम करती हैं। बड़े भाई रविंद्र स्वामी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। दोनों भाइयों की अभी शादी नहीं हुई थी। सतीश करीब 5 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। वे फरवरी में छुट्टी पर घर आने वाले थे। पूर्व सैनिक संघ के तहसील अध्यक्ष जगत सिंह ने बताया- सेना के अधिकारियों ने जानकारी दी कि पेट्रोलिंग के दौरान पहाड़ी से पैर फिसलने के कारण वे शहीद हुए हैं। शहीद के सम्मान के लिए बीकानेर से गार्ड्स की टीम पहुंचेगी। इसके बाद सेना के ट्रक को सजा कर तिरंगा यात्रा के साथ पार्थिव देह को पैतृक गांव ठिमाऊ ले जाया गया।


