राजस्थान के 2 जिलों में लेबर इंस्पेक्टर्स के पावर सीज:नागौर और डीडवाना-कुचामन का चार्ज दूसरों को सौंपा, कार्ड के लिए भटक रहे हजारों श्रमिक

नागौर जिले में असंगठित श्रमिकों को राज्य सरकार और केंद्र सरकार कि तरफ से मिलने वाली योजनाओं के लिए श्रम विभाग के ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विभाग की ओर से दो जिलों के लेबर इंस्पेक्टर के पावर सीज कर दिए गए है। उन्हें कुर्सी पर तो बैठाया है, लेकिन उनकी जिम्मेदारी दूसरे जिलों के लेबर इंस्पेक्टर को सौंप दी गई। इसके कारण दोनों जिलों में हजारों श्रमिकों की परेशानी बढ़ गई है। सरकारी स्कीमों की सहायता राशि के वितरण सहित अनेक योजनाओं के लिए आ रहे श्रमिकों के काम अटक गए हैं। दरअसल, यह पूरा मामला नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में चल रहा है। दोनों जिलों में लेबर डिपार्टमेंट के दो इंस्पेक्टरों को केवल पदनाम देकर बैठाया गया है। हकीकत में दोनों इंस्पेक्टर्स के पावर जुलाई महीने से ही सीज हैं। पढ़िए… पूरा मामला सरकारी योजनाओं के लाभ से श्रमिक हुए वंचित
असंगठित श्रमिकों के लिए लेबर कार्ड बनाया जाता है, जिसके जरिए कई सुविधाएं दी जाती है। इस कार्ड से ही एक श्रमिक और उसके परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है। लेकिन जुलाई महीने से ही नागौर और डीडवाना-कुचामन में यह काम नहीं हो रहा है। विभाग ने ज्यादा कार्ड आवंटित करने और आवेदन स्वीकृत करने के कारण यहां कार्यरत दोनों लेबर इंस्पेक्टर्स के पावर सीज कर दिए थे। इनके स्थान पर सीकर और चूरू के लेबर इंस्पेक्टर्स को यहां का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है। चार महीने में एक बार भी नागौर नहीं आए दोनों इंस्पेक्टर
जुलाई में नागौर के लेबर इंस्पेक्टर्स से चार्ज लेकर सीकर और चूरू के इंस्पेक्टर्स को यहां का अतिरिक्त चार्ज दिया गया। लेकिन 4 महीने के इस पीरियड में दोनों में से एक भी इंस्पेक्टर नागौर नहीं आया। चूरू में कार्यरत लेबर इंस्पेक्टर चूरू में ही बैठकर यहां के काम निपटा रहे हैं। जबकि नागौर में बैठे दोनों इंस्पेक्टर्स के पास श्रमिकों के डॉक्यूमेंट वेरिफाई करने तक का पावर नहीं है। इस वजह से श्रमिकों को ई-मित्र और दलालों को राशि देकर अपने आवेदन करवाने पड़ रहे हैं। ये दलाल वेरिफिकेशन करवाने के नाम पर श्रमिकों से वसूल रहे हैं और दूसरे जिलों में बैठे अधिकारियों से वैरिफिकेशन करवाने का दावा करते है। चूरू में बैठकर नागौर के आवेदनों की स्वीकृति
जानकारी के अनुसार- चूरू के इंस्पेक्टर खेमचंद ने 6 हजार से ज्यादा आवेदन चूरू में ही बैठकर स्वीकृत कर दिये हैं, जिनके आधार पर अब तक विभाग द्वारा 7 करोड़ से ज्यादा की राशि वितरित किया जा चुका है। वहीं तकरीबन 2000 से ज्यादा नये श्रमिक कार्ड भी जारी किये हैं। जबकि चूरू लेबर इंस्पेक्टर पर पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं। साल 2019 में 8 हजार कि रिश्वत लेते ट्रैप हुए थे, जिसकी फिलहाल जांच जारी है। वहीं सीकर लेबर इंस्पेक्टर ने अभी तक किसी फाइल को पास नहीं किया है। नागौर सहायक श्रम आयुक्त ऑफिस में जुलाई तक चार इंस्पेक्टर कार्यरत थे, जबकि श्रम आयुक्त का पद रिक्त था। 28 जुलाई 2025 को यहां कार्यरत एक इंस्पेक्टर नवल राम डांगी को पुराने मामले में सस्पेंड कर मुख्यालय जैसलमेर कर दिया गया। जबकि एक अन्य लेबर इंस्पेक्टर अशोक कुमार मीणा का प्रमोशन कर नवंबर में ही डीग लगाया गया है। अभी वर्तमान में यहां दो इंस्पेक्टर कुलदीप यादव और मुकेश कुमार कार्यरत हैं। नवंबर महीने में आए 11 हजार आवेदन, 5 हजार ऑटो रिजेक्ट हुए
जानकारी के अनुसार- डीडवाना-कुचामन समेत नागौर में इसी साल अक्टूबर में कुल 4730 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 417 रिजेक्ट किए गए। जबकि 4024 आवेदकों को 45 करोड़ की राशि का भुगतान अकेले इंस्पेक्टर ने करवा दिया। नवंबर महीने में भी 11139 आवेदन प्राप्त हुए, इनमें से 5227 रिजेक्ट हुए। इनमें रिजेक्टेड आवेदनों में से 4987 आवेदन सिस्टम द्वारा ऑटो रिजेक्ट हुए हैं। अधिकारी द्वारा मात्र 240 आवेदन ही रिजेक्ट किये है, बाकी 2059 को 23 करोड़ राशि का भुगतान किया गया। जबकि अन्य आवेदन अभी पेंडिंग में हैं। अधिकारी सीज करने के लिखित निर्देश नहीं, सिर्फ मौखिक आदेश दिए गए
नागौर के चार लेबर इंस्पेक्टर को कोई लिखित आदेश तो नहीं दिया गया, लेकिन अनियमितता का आरोप लगाकर उनके अधिकार सीज कर दिए गए। ज्यादा आवेदन स्वीकार करने और राशि स्वीकृत करने के कारण उनके पावर सीज किये थे। लेकिन नागौर में जितने आवेदन 4 इंस्पेक्टर्स द्वारा हर माह स्वीकृत किये जा रहे थे, उनसे भी ज्यादा आवेदन चूरू में बैठे अकेले इंस्पेक्टर ने स्वीकृत कर दिये और करीब 7 करोड़ से ज्यादा राशि जारी कर दी। जबकि इस दौरान इनके पास चूरू का भी प्रभार है। श्रमिक नरपतराम ने बताया- करीब 6 महीने हो गए है। मेरे फॉर्म का पैसा नहीं मिल रहा है। यहां ऑफिस में बताया जाता है कि आपका फॉर्म रिजेक्ट हो गया है, जो पैसे दे रहे हैं, यहां केवल उन्हीं का काम हो रहा है। लेबर इंस्पेक्टर बोले- हमारी आईडी जुलाई से फ्रीज
लेबर इंस्पेक्टर कुलदीप यादव ने बताया- हमारी आईडी जुलाई में फ्रीज कर दी गई थी। लिखित में हमें कोई कारण नहीं बताया गया था, मौखिक तौर पर हमें विभाग से जानकारी मिली कि नागौर में ज्यादा रजिस्ट्रेशन किये गए, इसलिए यहां के पावर सीज कर दिये गए हैं और इसकी जगह नागौर का जो कार्यभार है, वो सीकर और चूरू जिले को दिया गया है। सहायक श्रम आयुक्त बोले- किस कारण आईडी फ्रीज हुई, निराकरण करवाएंगे
सहायक श्रम आयुक्त राकेश चौधरी ने कहा- मैंने हाल ही में जॉइन किया है। मामला मेरे संज्ञान में आया है। मुख्यालय में बात करके इंस्पेक्टर्स की आईडी किस कारण फ्रीज की गई है, उसमें सुधार करवाकर जल्द इसका निराकरण करवाएंगे और जल्द से जल्द नागौर में काम सुचारु किया जाएगा।

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