पुलिस की इमरजेंसी डायल-112 का काम जीवीके कंपनी को मिलने जा रहा है। यह कंपनी राजस्थान में भी पुलिस गाड़ियों का संचालन कर रही है। वहां 92,700 रुपए मासिक पर एक गाड़ी का संचालन हो रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ में 1.25 लाख में एक वाहन पर खर्च होंगे। 18 दिसंबर को खबर प्रकाशित होने के बाद गृह मंत्री विजय शर्मा ने दोनों राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने के आदेश दिए। इसमें पाया गया कि छत्तीसगढ़ में वाहन की दरें राजस्थान की तुलना में कम हैं। क्योंकि वहां बिल में 18% जीएसटी अलग से है। जबकि छत्तीसगढ़ में बिल में ही जीएसटी जुड़ी हुई है। राजस्थान में ड्राइवर यानी कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 8,034 रुपए है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 12,606 रुपए है। इस तरह 57 प्रतिशत अधिक वेतन यहां ड्राइवरों को देना होगा। राजस्थान में 2500 किमी तय है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह सीमा 3350 किमी प्रति माह रखी गई है। इससे मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ेगा। जीवीके के कागजों को दोबारा जांचा गया पुलिस ने जीवीके कंपनी को काम सौंपने से पहले उनके कागजात की दोबारा जांच की। वर्तमान में जीवीके चार राज्यों में डायल-100 और डायल-112 सेवाओं का संचालन कर रही है। जहां 3200 इमरजेंसी रिस्पांस वाहन संचालित हो रहे हैं। वर्ष 2011 से 2019 के बीच जीवीके ने ही छत्तीसगढ़ में 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस चलाई। इस अवधि के दौरान 20,55,000 को लाभ दिया गया। वहीं 102 में 2013 से 2023 के दौरान 69,38,00 लाभार्थी रहे। छत्तीसगढ़ में राजस्थान से अपग्रेड वाहन राजस्थान में चलने वाली डायल-112 की गाड़ियां बी-4 वेरिएंट की हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में बी-6 गाड़ियां चलाई जाएंगी। इनके वाहनों के स्पेयर पार्ट्स की मरम्मत और रखरखाव अधिक होगा। अफसरों को कंपनी ने बताया कि राजस्थान में हर महीने बिल पास किया जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ में हर तीन महीने में बिल पास होगा, यह भी अतिरिक्त भार कंपनी पर होगा। डायल-112 के टेंडर को लेकर भी अफसरों ने गृहमंत्री को बताया कि जब टेंडर किया गया था तब जेम में भंडार क्रय नियम नहीं लागू होता था। जेम के नियम में था कि दो बिड आने पर भी एल-1 को काम दिया जा सकता है।


