राजस्थान यूथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी भंग:एक आदेश में सभी पदाधिकारी पदमुक्त; निष्क्रियता और गुटबाजी बनी वजह

राजस्थान कांग्रेस संगठन से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान यूथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। यह आदेश मंगलवार को यूथ कांग्रेस प्रभारी विकास छींकारा, सह-प्रभारी ज्ञानेश शुक्ला और कपिल देसाई के हस्ताक्षरों से जारी किया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय संगठन के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया है। प्रभारी की रिपोर्ट के बाद कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला किया गया। निष्क्रियता बनी बड़ी वजह सूत्रों के अनुसार, प्रदेश यूथ कांग्रेस की 344 पदाधिकारियों वाली जंबो कार्यकारिणी में अधिकांश पदाधिकारी लंबे समय से निष्क्रिय चल रहे थे। संगठन को जितनी सक्रियता की अपेक्षा थी, वह नजर नहीं आ रही थी। इसी कारण अब नई ऊर्जा और सक्रिय युवा नेतृत्व को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है। पहले भी दिए गए थे नोटिस युवा कांग्रेस में करीब दो माह पहले 200 से अधिक निष्क्रिय पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से कई पदाधिकारियों ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। बताया जा रहा है कि संगठन के भीतर गुटबाजी और धड़ेबंदी के चलते संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। धरना-प्रदर्शन और बैठकों में भी पदाधिकारियों की उपस्थिति बेहद कम देखी जा रही थी। 6 माह पहले ही हुए थे मनोनयन पार्टी नेताओं के अनुसार, राजस्थान यूथ कांग्रेस में आमतौर पर चुनाव प्रक्रिया के जरिए पदाधिकारी चुने जाते हैं, लेकिन करीब छह माह पहले तत्कालीन प्रभारी द्वारा चुनाव नियमों को दरकिनार कर बड़ी संख्या में मनोनयन किए गए थे। इसके बावजूद संगठन अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं हो पाया। अब इन नेताओं के हाथों में कमान प्रदेश कार्यकारिणी भंग होने के बाद फिलहाल संगठन का संचालन अभिमन्यु पूनिया – प्रदेश अध्यक्ष, यशवीर शूरा- कार्यकारी अध्यक्ष और सुधींद्र मूंड – कार्यकारी अध्यक्ष के नेतृत्व में किया जाएगा। जल्द बनेगी नई कार्यकारिणी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन जल्द किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बार समर्पित, निष्ठावान और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। कार्यकारिणी भंग होने के बाद से ही यूथ कांग्रेस में पदों के दावेदार युवा नेताओं ने लॉबिंग तेज कर दी है। इस फैसले को संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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