राजस्व नक्शों में हेराफेरी, मुकदमे बढ़े:मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम से कई गांवों का लैंड रिकॉर्ड लॉक, बैंक के लोन अटके व खेतों की सीमाएं बदलीं

प्रदेश में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) में हो रहे काम की वजह से कई गांवों का लैंड रिकॉर्ड लॉक हो रखा है। नक्शों में किसानों के खेतों की सीमाएं बदल गई। वहीं जमाबंदी में भी कई किसानों की भूमि का क्षेत्रफल कम-ज्यादा हो गया। रेवेन्यू रिकॉर्ड लॉक की वजह से किसान जमाबंदी में दुरुस्ती व नामातंकरण नहीं करवा सकते है। रहन नामातंकरण नहीं होने की वजह से किसान कृषि कार्य के लिए बैंक से लोन भी नहीं ले पा रहे है। किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन रहे है। किसानों के बेचान सहित अन्य नामातंकरण भी नहीं खोले जा रहे है। डीआईएलआरएमपी प्रोजेक्ट के अंतर्गत सेग्रीगेशन एवं वन टू वन मैचिंग करते हुए शत प्रतिशत तरमीम का काम किया जा रहा है। लेकिन इस प्रोजेक्ट में काम की गति बहुत दी धीमी है। जयपुर जिले की चौमूं में डीआईएलआरएमपी का काम वेपकॉप्स कंपनी कर रही है। चौमूं तहसील में इस सप्ताह पूरा होगा काम
जयपुर जिले की भू प्रबंध अधिकारी मुक्ता राव का कहना है कि चौमूं तहसील में मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम का काम इसी सप्ताह पूरा हो जाएगा। अपडेशन का काम अंतिम दौर में है। डीआईएलआरएमपी के बाद किसानों के आपसी झगड़े कम होंगे और रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी। सैटेलाइट से नाप रहे हैं खेत-खलिहान
डीआईएलआरएमपी के पहले फेज में आमेट, उनियारा, सिवाणा, पीपाड़ तहसीलों में सर्वे और री-सर्वे का कार्य पूरा हो गया है। इसका काम फिलहाल चौमूं तहसील में चल रहा है। दूसरे फेज में 45 तहसीलों में काम होगा। हालांकि दूसरे फेज में जयपुर की एक तहसील भी नहीं है। सर्वे और री-सर्वे में सैटेलाइट से राजस्व ग्राम व खेत का नक्शा बन रहा है। इस में मौका, जमाबंदी व नक्शा में खेत की नाप हो रही है। जिन किसानों के मौके पर ज्यादा जमीन है, वो सरकारी दर्ज हो रही है। इससे सरकारी लैंड बैक भी बनाया जा रहा है। राजस्व नक्शों में हेराफेरी, मुकदमे बढ़े
विधानसभा में राजस्व नक्शों में हेराफेरी का आरोप लगाया था। वहीं लोगों का कहना है कि सेटेलाइट इमेज के नाम पर उनकी जमीन कम की जा रही है और प्रभावशाली लोगों के नाम दर्ज हो रही है। अब अपनी जमीन वापस हासिल करने के लिए अदालतों में मुकदमा लड़ना पड़ रहा है। प्रदेश के हर जिले में बनेगी आदर्श तहसील
मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम प्रदेश के हर जिले में आदर्श तहसील का निर्माण किया जाएगा। ताकि रेवेन्यू से जुड़े कार्यों की कार्यप्रणाली और सेवाओं को बेहतर किया जा सके। इसके लिए रेवेन्यू बोर्ड की ओर से हर जिले में श्रेष्ठ तहसीलदार का चयन किया है और कार्यशाला में इन्हे बेहतर काम करने की सीख दी जाएगी। इन आदर्श तहसीलों से सीख लेकर दूसरी तहसीलों के काम काज में भी सुधार किया जाएगा। इसके लिए हर जिला के कलेक्टर मॉनिटरिंग करेंगे। इसके साथ ही भू अभिलेख मानचित्र, सूचनाओं का संधारण, भूमि खसरा, नक्शा, नामांतरण, राजस्व अभिलेख तैयार करने का काम होगा। राजस्व वसूली, अतिक्रमण, भूमि विवाद, गोचर भूमि, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और रेवेन्यू प्रकरण की मॉनिटरिंग कर एक समय सीमा में इनका निस्तारण किया जाएगा।

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