बालाघाट में राजस्व महाभियान-3.0 की प्रगति को लेकर कलेक्टर मृणाल मीणा लगातार समीक्षा बैठकों से पटवारियों को फार्मर रजिस्ट्री, खसरे से आधार लिंकिंग और नक्शा तरमीम की गति बढ़ाने को लेकर निर्देशित कर रहे हैं। लेकिन शहरी क्षेत्र और लगे हल्कों में इन सभी कार्यों की गति काफी धीमी है। शहरी और लगे हल्कों भरवेली, कोसमी, भटेरा, खैरी, कुम्हारी, बोदा, बगदर्रा, हिरापुर और आंवलाझरी, नवेगांव में फार्मर रजिस्ट्री, खसरे से आधार लिंकिंग और नक्शा तरमीम का काम लक्ष्य की तुलना में काफी कम है। खासकर शहरी हल्कों में इन सभी कार्यों की गति काफी धीमी है। जबकि यहां, स्वामित्व, पीएम किसान और किसान आईडी जैसे काम नहीं है। आंकड़ों की मानें तो बालाघाट और गायखुरी, सरेखा में ईकेवायसी में 14 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। इससे लगे हल्को कोसमी, भटेरा, बुढ़ी में 5 हजार से ऊपर लंबित हैं। ऐसी ही स्थिति नक्शा तरमीम में औसतन लगभग दो से ढाई हजार के ऊपर है। शहर से लगे और अन्य ग्रामीण हल्कों में फार्मर रजिस्ट्री में औसतन चार सौ से ज्यादा पेडिंग हैं। एसडीएम गोपाल सोनी बताते है कि बालाघाट शहरी क्षेत्र है और शहर से लगी बड़ी पंचायते हैं। वो लगभग अब आबादीनुमा हो चुकी है, जिससे यहां प्लॉटिंग सबसे ज्यादा है। जो हमारे खसरों में बटांकन है, वो सभी प्लॉटों के हैं। ऐसी स्थिति में उसमें बटांकन किया जाना, एक बहुत बड़ा काम है। भू-अभिलेख नियमावली में स्पष्ट है कि 5 डिसमिल या 20 आर-ए, जो लगभग 24 सौ वर्गफीट होता है, उससे ऊपर के प्लॉटों को ही हम नक्शे में अंकित कर पाते हैं। लेकिन यहां पर ऐसे प्लॉटों की संख्या बहुत अधिक है। नियमावली से छोटे प्लॉटों की संख्या ज्यादा है। ऐसी स्थिति में नक्शा बटांकन का काम उनमें नहीं हो पा रहा है। साथ ही शहरी क्षेत्र बड़ा है और यहां पर केवल चार पटवारी है, ऐसी स्थिति में यहां प्रगति कम है। फिर भी हम कोशिश कर रहे है, जो आसपास के पटवारी है जिनके पास काम कम है, उनको शहर में पटवारियों के साथ लगाकर काम को गति देंगे।


