झारखंड में कोयला और आयरन ओर के सेस की दर अलग-अलग हो सकती है। राज्य की आय का स्रोत बढ़ाने के लिए गठित राजस्व संवर्द्धन समिति ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की है। वित्त विभाग के विशेष सचिव की अध्यक्षता में गठित संवर्द्धन समिति ने मुख्य सचिव अलका तिवारी और वित्त सचिव प्रशांत कुमार को यह रिपोर्ट सौंपी है। अब मुख्य सचिव ने खान विभाग को इस पर एक मत बनाकर शासी निकाय (जीबी) के सामने मामला रखने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में सरकार की आय में बढ़ोतरी के स्रोत के साथ ही खनन क्षेत्र में लागू पुराने करों में वृद्धि और न्यायिक मामलों में लंबित वसूली में तीव्रता लाने की अनुशंसा भी की गई है। समिति ने राजस्व संग्रह में तेजी लाने के कई नए स्रोत भी सुझाया है। साथ ही राजस्व उगाही में आने वाली वैधानिक अड़चनों को दूर करने का रास्ता भी बताया है। अब खान विभाग के प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री की सहमति ली जाएगी। फिर इसे शासी निकाय के सामने रखा जाएगा। वहां इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। पहले राज्यों को खनिजों पर टैक्स या सेस लगाने का अधिकार नहीं था खनिजों पर टैक्स या सेस लगाने का अधिकार पहले राज्य सरकार को नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2024 को एक आदेश में कहा कि राज्यों को खनिजों पर टैक्स और सेस लगाने का अधिकार है। खनिज अधिकारों पर टैक्स लगाने की विधायी शक्ति राज्य विधानसभाओं में निहित है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खनिजों पर लगने वाली रॉयल्टी को टैक्स नहीं माना जा सकता। अभी तक खनिजों पर कोई टैक्स नहीं है। बस रॉयल्टी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने राज्य के खनिजों पर अक्टूबर 2024 से सेस (उप कर) लगा दिया। सेस की दर अलग करने के पीछे ये तर्क दिए समिति ने खनिजों के खनन और ढुलाई पर कोई सेस लगाने की अनुशंसा नहीं की है। बल्कि पहले से लगे सेस की दर में बदलाव की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जुलाई 2024 में दिए गए एक फैसले के बाद अभी कोयला और आयरन ओर पर समान रूप से 100 रुपए प्रति टन सेस लगा हुआ है। जबकि, कोयला और लोहे के बाजार मूल्य में काफी अंतर है। रॉयल्टी की दर भी अलग है। आयरन ओर की बिक्री दर पर 15% और कोयले की बिक्री दर पर 14% रॉयल्टी तय है। इसी आधार पर समिति ने दोनों खनिजों पर अलग-अलग सेस तय करने की अनुशंसा की है। समिति ने कोयले पर कम से कम 200 रु. व आयरन ओर पर 300 रु. प्रति टन सेस लगाने की बात कही है। पर, अंतिम निर्णय लेने का अधिकार शासी निकाय पर छोड़ दिया है। विशेष सचिव की अध्यक्षता में 10 दिसंबर 2024 को बनी थी राजस्व संवर्द्धन समिति झारखंड सरकार ने राज्य की वित्तीय हालत सुधारने और विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए 10 दिसंबर 2024 को विशेष सचिव अमीत कुमार की अध्यक्षता में राजस्व संवर्द्धन समिति बनाई थी। इसमें खान निदेशक,, वाणिज्य कर आयुक्त व महाधिवक्ता के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। इसके अलावा संयुक्त परिवहन आयुक्त, भूअर्जन निदेशक और वित्त विभाग के संयुक्त सचिव को सदस्य बनाया गया है। गौरतलब है कि राज्य में पिछले साल 28 नवंबर को नई सरकार बनते ही कहा गया था कि आय के नए स्रोत तलाशे जाएंगे। खनन क्षेत्र के टैक्स की भी समीक्षा होगी। सरकार खनन क्षेत्र से होने वाली आय का फिर से मूल्यांकन करेगी। ताकि उसे बेहतर तरीके से बढ़ाया जा सके।


