जीवन में सुख चाहते हो तो अहम और वहम में जीना छोड़ दो, वाणी को ऐसा रखो जो बंटवारा नहीं हमेशा एक जुटता एकता रखे। हमेशा कम बोलो और काम का बोलो। यह उदगार आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि आदित्य सागर महाराज ने शांतिनाथ जैन मंदिर में व्यक्त किए। बुधवार को राजधानी भोपाल में तीन संत मुनिश्री आदित्य सागर, अपरिमित सागर, सहज सागर का आगमन हुआ,इस मौके पर संतों की अगवानी के लिए शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें नमोस्तु शासन जयवंत हो के जयकारों से माहौल गूंज उठा। नववर्ष का पहला दिन जैन समाज के लिए श्रद्धा और हर्ष से भरा रहा। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री आदित्य सागर, मुनिश्री अपरिमित सागर, मुनिश्री सहन सागर और कुल्लक श्रेयश सागर महाराज का बुधवार को राजधानी में आगमन हुआ। जैन समाज के लोगों ने केसरिया धर्म ध्वजा लेकर गाजे-बाजे और जयकारों के साथ नारी शक्ति के नेतृत्व में शोभायात्रा निकाली। मुनिश्री विदिश्व से पद विहार कर लालघाटी स्थित शांतिनाथ जिनालय में अनुष्ठान के लिए आए। शोभायात्रा में धार्मिक झांकियां, 151 युवाओं का दिव्य घोष और स्लोगन वाले पोस्टर विशेष आकर्षण रहे। शांतिनाथ जिनालय, नंदीश्वर जिनालय समिति, अखिल भारतीय महिला परिषद, त्रिशला माता राखा और अन्य मंडलों ने भक्तिमय प्रस्तुतियां दी। माहौल को आध्यात्मिक बनाने में लेजम ग्रुप और भक्ति मंडलों का योगदान उल्लेखनीय रहा। इस अवसर पर मुनिश्री के प्रेरक आशीर्वचन भी हुए। मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट होना चाहिए, आपके चेहरे की मुस्कुराहट जीवन की जीवटता को मज़बूत कर उलझन को वैसे ही दूर कर देती है, हमेशा पॉजिटिव रहो आपके आचार व्यवहार बोलचाल हमेशा ऐसा हो परिवार समाज में सकारात्मक बनी रहे। मुनि श्री ने कहा जीवन की सफलता के लिए मौन सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति है उन्होंने कहा आने वाली पीढ़ी को रास्ता बताने के लिए संत निरंतर पद विहार करते रहते हैं। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया गाजे बाजे के साथ केसरिया धर्म ध्वजा तले शोभायात्रा लालघाटी चौराहे से प्रारंभ हुई, इस दौरान बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी सत्य, अहिंसा और जीव दया का संदेश देते हुए चल रहे थे। नमोस्तु शासन जयवंत हो के जयकारे गूंज रहे थे। नव वर्ष के प्रथम दिन श्रद्धा भक्ति और आस्था का अर्भूतपूर्व संगम राजा भोज की नगरी में दिखाई दिया।सभी भक्ति के रंग में रंगे थे।


