राज्यपाल बोले- अपने पास सभ्यता होना बहुत जरूरी:आपकी परंपरा डिग्री-फोटो लेकर बैठे, लेकिन सभी बाहर चले जाते हैं, आज आखिर में डिग्रियां दे रहे

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि अपने पास सभ्यता होना बहुत जरूरी है। आपकी परंपरा है, कि एक-एक संकाय का नाम पुकारा और डिग्री-फोटो लेकर अपनी जगह पर बैठना होता है। लेकिन जगह पर नहीं बैठते वह सभी बाहर चले जाते हैं, और वापस नहीं आते हैं। इसलिए आप सभी समझ गए होंगे कि मैं डिग्रियां पहले क्यों नहीं बांट रहा था। उसी का परिणाम है कि आज आखिर में डिग्रियां दे रहे हैं। बागड़े ने कहा- आजकल नौकरी बहुत कठिन है। जिसकी बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी वहीं नौकरी कर पाएगा। जिनकी नहीं वह पीछे रहेगा। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े गुरुवार को अजमेर में एमडीएस यूनिवर्सिटी के 13वां दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में कुल 104677 डिग्री का वितरित की गई। वही समझ में 54 पीएचडी डिग्री और 40 गोल मेडल दिए गए। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत और कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश अग्रवाल मौजूद रहे। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा- दीक्षांत का यह पावन अवसर हमें हमारी उस प्राचीन भारतीय संस्कृति से जोड़ने वाला है। जिसमें गुरु अपने शिक्षक को शिक्षा समाप्ति के बाद अंतिम उपदेश दिया करते थे। यह उपदेश होता था की सदा सत्य का आचरण करेंगे। कर्म के साथ चलेंगे और सदा अपनी शिक्षा का अहंकार नहीं करेंगे। विकसित भारत बनाने के लिए युवाओं की भूमिका जरूरी बागड़े ने कहा- दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं विद्यार्थियों के लिए नव नवीन का आरंभ है। यही वह अवसर है जहां आप अपनी प्राप्त शिक्षा का उपयोग राष्ट्र और समाज उत्थान के लिए करेंगे। भारत आज विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था पर है। 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में युवाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। शारीरिक स्थिति अच्छी होना बहुत जरूरी बागड़े ने कहा- विश्वविद्यालय के कैंपस में स्वच्छ, सुंदर और फूल और फलों के पेड़ लगे हुए हो और बुद्धि विकसित बने ऐसा माहौल होना चाहिए। बौद्धिक क्षमता बढ़ाए ऐसा वातावरण यहां होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दृष्टि विशाल होना यही शिक्षा का अर्थ है, दृष्टि विशाल रही तो किसी को बहुत समझ आता है और उसके बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है। खेलकूद के भी अच्छे होने चाहिए। इससे शारीरिक क्षमता भी बढ़ेगी। शारीरिक स्थिति अच्छी नहीं रही तो कितनी भी डिग्री हो या बुद्धिमान हो उसका कोई राष्ट्र और समाज के लिए उपयोग नहीं होगा। आपकी शिक्षा का उपयोग दूसरों को करना है और अपनी शारीरिक स्थिति भी अच्छी बनाने की जरूरत है। दृष्टि विशाल करने की भी जरूरत है। सभ्यता होना बहुत जरूरी बागड़े ने कहा- अपने पास सभ्यता भी होनी चाहिए। आप सभी को समझ आ गया होगा कि मैं डिग्रियां पहले क्यों नहीं बाटीं। आपकी परंपरा है की एक-एक संकाय का नाम पुकारा और डिग्री लेकर फोटो निकाल कर अपनी जगह पर बैठना था। लेकिन जगह पर नहीं बैठते। वह सभी बाहर चले जाते और वापस नहीं आते हैं। 21 दिसंबर को सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में भी था। जो अच्छा भरा हुआ था। हम सब पदक और डिग्रियां बांट रहे थे। बाद में समझ आया की बहुत कुर्सियां खाली हो गई। उस दिन गुस्से में बोल भी दिया यह सभ्यता नहीं है। दूसरे दिन राणा प्रताप यूनिवर्सिटी में भी कार्यक्रम था। वहां का हाल भी खचाखच भरा हुआ था। लेकिन वहां का एक भी विद्यार्थी आखिरी तक बाहर नहीं गया। क्योंकि पहले दिन जो बोला वह दूसरे दिन ध्यान में आया। फोटो कभी भी निकाल सकते हैं। भाषण के बाद भी निकाल सकते हैं। फोटो सभी के निकल जाएंगे चिंता मत कीजिए। उसी का परिणाम है कि आज आखिर में डिग्री दे रहे हैं। जिसकी बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी वहीं नौकरी पर जाएगा बागड़े ने कहा- पहले कभी-कभी ऐसी सभा में कीर्तन हुआ करते थे। तभी लोग रात के समय उठ जाते थे। ऐसा ही एक प्रवचन व्यक्ति था जो प्रवचन करने बैठा था। प्रवचन करते-करते सभी लोग चले गए सिर्फ एक आदमी बैठा रहा। आखिर में प्रवचन करने वाले ने उससे कहा कि तू बहुत अच्छा आदमी है, तेरे ऊपर उपकार रहना चाहिए कि तू अकेला-अकेला प्रवचन सुनता रहा। तभी दूसरे ने कहा कि इसलिए नहीं बैठा मेरी चद्दर आपकी पांव के नीचे पड़ी हुई है। तो इसलिए मैं भी बैठा हूं। इसलिए सभ्यता बहुत जरूरी है। जीवन के लिए सभ्यता बहुत जरूरी है। जो सभ्यता मन और व्यवहार में रखेगा उसका भविष्य अच्छा रहेगा और वह आगे भी जाएगा। बागड़े ने कहा- आजकल नौकरी बहुत कठिन है। जिसकी बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी वहीं नौकरी पर जाएगा। जिनकी नई है वह पीछे रहेगा। कभी पीछे रहने के बाद शिक्षक बन जाएंगे और फिर उन विद्यार्थियों का क्या होगा। ऐसे लोग लोग शिक्षक बने जो पीछे रहने वाले तो विद्यार्थियों का क्या होगा। आप आईएएस आईपीएस ऑफिसर बने यह इच्छा शक्ति क्यों नहीं बन रही उसका यही कारण है आपके मन में डर है। अगर हिम्मत होगी कि मैं यह परीक्षा भी पास कर लूंगा तो वह परीक्षा भी पास कर लेंगे। लेकिन वह हिम्मत नहीं है। जो जोश हिम्मत थी वह आज नहीं रही है। हिम्मत केवल कॉलेज से नहीं प्राइमरी स्कूल से ही बढ़ेगी।

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