राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही चुनाव आयोग पर जमकर हमला बोला। दिग्विजय ने कहा- मेरे भी कई मित्र आरएसएस में हैं। मैंने पता लगाया और उनसे जानकारी ली। पूछा- अमित शाह कभी आरएसएस में रहे या नहीं? सब ने कहा कि कभी आरएसएस में रहे ही नहीं। दिग्गी ने पूछा- आरएसएस एनजीओ पंजीकृत है या नहीं
दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में अपना भाषण समाप्त करने से ठीक पहले कहा- पहली बात तो यह है कि आरएसएस एनजीओ पंजीकृत है या नहीं है? नहीं है तो प्रधानमंत्री जी लाल किले से कहते हैं विश्व का सबसे ज्यादा लोकप्रिय एनजीओ आरएसएस है। उस पर कोई कानून लागू नहीं होता, क्योंकि पंजीकृत नहीं है, ना तो उसकी सदस्यता है। दिग्विजय सिंह ने कहा- यह तो वही बात हो गई ना, खाता ना बही, जो मोदी जी कहें वही सही। अमित शाह कहें वही सही। दिग्विजय ने कहा उनकी(RSS) गुरु दक्षिणा करोड़ों रुपए में आती है। दिग्विजय ने घनश्याम तिवारी (बीजेपी सांसद की तरफ देखकर कहा) आप बताइए आप गुरु दक्षिणा देते हैं तो वह किस खाते में जाती है? कभी पूछा आपने? प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि हम गर्व से कहते हैं, नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक रहे हैं और उन्होंने खुद के लिए कहा कि वह भी 10 साल की उम्र से शाखाओं में जाते थे। दिग्विजय ने कहा- मेरे भी कई मित्र लोग आरएसएस में हैं। मैंने पता लगाया और उनसे जानकारी ली कि अमित शाह कभी आरएसएस में रहे या नहीं रहे? सब ने कहा कि कभी आरएसएस में रहे ही नहीं। कानून मंत्री ने किया पलटवार
दिग्विजय की बात का जवाब देते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा- अमित शाह जी ने संसद में कहा था कि मैं इक्कीस साल की उम्र से नारा लगाता रहा हूं कि देश की गलियां सूनी हैं, इंदिरा गांधी खूनी हैं। संघ की जहां तक बात है तो जो व्यक्ति एक बार शाखा में ध्वज प्रणाम कर लेता है, वो संघ का सदस्य होता है। उन्होंने(अमित शाह) यही कहा। चुनाव आयोग पर पत्रों की अनदेखी का आरोप दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैंने, हमारे अध्यक्ष जी को 21 पत्र दिया। उनकी प्रतिलिपि में दे रहा हूं, जो सिटिजन कमिशन ऑन इलेक्शंस के जस्टिस लोकुर द्वारा चुनाव आयोग को 21 पिटीशन दिए गए। उन पर संज्ञान तक नहीं लिया गया। मैंने 23 -24 सितंबर 2024 को चुनाव आयोग को पत्र लिखा इसका उल्लेख भी यहां पर कर रहा हूं। दिग्विजय सिंह ने कहा- मैं सारे पत्र, जो मैंने चुनाव को लिखे गए थे। वो सदन के पटल पर रख रहा हूं।
लेकिन चुनाव आयोग ने गृहमंत्री को गुमराह करके गलत बयानी कराई, हमें इस बात की आपत्ति है। एक संवैधानिक चुनाव आयोग गृहमंत्री को गुमराह कर रहा है या गृहमंत्री जी हम लोगों को गुमराह कर रहे हैं? सभापति जी, मैं आपसे और अपनी पार्टी से इजाजत चाहूंगा कि चुनाव आयोग ने अगर गृहमंत्री को गुमराह किया तो उन पर कार्रवाई होना चाहिए और यदि गृहमंत्री हम लोग को गुमराह कर रहे हैं तो उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। मैं तो यहां तक कहता हूं कि इंडिया अलायंस के सारे लोगों ने चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा। उसमें नीतीश कुमार भी शामिल थे, उनके भी दस्तखत थे लेकिन समय देने के बजाय चुनाव आयोग से हम लोगों को पावती तक नहीं मिली। दिग्विजय ने कहा- यह सब काम पूर्व चुनाव आयुक्त (राजीव कुमार) के बनने के बाद शुरू हुआ। नहीं तो पहले हम जब भी समय मांगते थे। हमें चुनाव से कभी कोई दिक्कत नहीं होती थी। दिग्विजय बोले- देश में फासिस्ट डिक्टेटरशिप लागू करना चाहते हैं दिग्विजय सिंह बोले- जैसा राहुल गांधी ने कहा था कि इस देश में 2014 के बाद जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं हैं। उन पर एक निश्चित विचारधारा के लोगों को बैठाया जा रहा है। वह योग्य हों या अयोग्य हों। यहां पर मेरा यह आरोप है कि उनके माध्यम से वे फासिस्ट डिक्टेटरशिप लागू करना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी यह उदाहरण हैं। हिटलर भी चुनाव जीत कर आए थे। मुसोलिनी भी चुनाव जीत कर आए थे। लेकिन अंत में यह सारे संवैधानिक संस्थानों पर कब्जा करके फासिस्ट डिक्टेटरशिप कायम की। जो रास्ता आज हम देख रहे हैं। भारत में वह उसी तरफ इंगित करता है। पुतिन और किम भी कहते हैं हम चुनाव जीतकर आते हैं आगे दिग्विजय सिंह बोले- आज रसिया के पुतिन भी कहते हैं कि हम चुनाव जीत कर आते हैं। नॉर्थ कोरिया के किम भी कहते हैं, हम चुनाव जीत कर आते हैं। इसी प्रकार के यहां चुनाव हो रहे हैं। मुझे भी राजनीति में 50 साल हो गए, किसी भी चुनाव में किसी राजनीतिक दल के 90% वोट स्ट्राइक रेट हमने नहीं देखा, यह कहां से हो गया? दिग्विजय बोले- एसआईआर के नाम पर नागरिकता की जांच क्यों? दिग्विजय ने कहा- वोटर लिस्ट के बारे में किसी भी सफल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए फूल प्रूफ मतदाता सूची होनी चाहिए। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होना चाहिए। आर्टिकल 324 भी, इसकी जवाबदारी चुनाव आयोग को देता है कि इलेक्शन कमीशन के जवाबदारी है कि हर नागरिक का वोट वह मतदाता सूची में शामिल करें। अभी तक यही होता आया है कि बूथ लेवल ऑफिसर हमारे घर आता था, वह फार्म भरता था, हम नहीं भरते थे। वही हमारे नाम जोड़ता था लेकिन अब यह एसआईआर कहां से आ गया? हमसे नागरिकता के प्रश्न पूछे जा रहे हैं हमारे बाप- दादा का पूछा जा रहा है कि उनका नाम मतदाता सूची में था या नहीं? कई ऐसे परिवार हैं। जिन्होंने और उनके बाप, दादा ने मेट्रिकुलेशन नहीं किया। उनसे मेट्रिकुलेशन का सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। क्या यह नागरिकता का चयन हो रहा है? या मतदाता की सूची बना रही है? दिग्विजय बोले- एसआईआर की आवश्यकता नहीं मैं समझता हूं एसआईआर की आवश्यकता नहीं है। जब हर वर्ष साल में चार बार चुनाव आयोग समरी रिवीजन करता है तो एसआईआर की आवश्यकता क्या है? एसआईआर का निर्णय किसने लिए, यह भी मालूम नहीं है। इसमें दो आरटीआई लगाई गई। सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने एक आरटीआई लगाई कि एसआईआर 2025 को कई राज्यों में कराया जा रहा है। उसका फाइल पर कोई आदेश हुआ है या नहीं? उसका जवाब आया कि इस प्रकार का हमारे पास फाइल पर कोई आदेश नहीं है। दूसरी आरटीआई में पूछा गया कि बिहार में एसआईआर करने का निर्णय किया, उसमें कोई आदेश दिया है क्या? उसका भी फाइल पर कोई आदेश नहीं हुआ। एक व्यक्ति के तीन-चार जगह नाम जुड़े हैं दिग्विजय बोले- वोट चोरी की बात सामने है। चारों तरफ हम देख रहे हैं कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र के कई प्रमाण राहुल गांधी ने दिए। अब यह भी एक चिंता का विषय है कि एक व्यक्ति के तीन-चार जगह, 25- 50 जगह नाम जुड़े हुए हैं। डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उपयोग से 1 मिनट में सारे नाम पता लगा ले लेकिन जब यह बात सामने आई तो चुनाव आयोग ने संज्ञान में लेने के बजाय उन्होंने डी-डुप्लोकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग करना ही बंद कर दिया। आखिर यह पक्षपात नहीं तो क्या है? चुनाव की घोषणा के साथ ही वोटर लिस्ट फ्रीज हो दिग्विजय ने कहा- मैं सुझाव देना चाहता हूं। जिस दिन चुनाव की घोषणा हुई। उसके बाद वोटर लिस्ट उम्मीदवार को दी जाती है, लेकिन जिस दिन वोटिंग होता है। उस दिन प्रोसिडिंग ऑफिसर को अलग लिस्ट दी जाती है। जबकि चुनाव घोषणा से लेकर मतदान के दिन के बीच में नाम जोड़ने और हटाने अधिकार क्यों दिया हुआ है? जिस दिन चुनाव की घोषणा होती है। उसी दिन वोटर लिस्ट को फ्रीज कर देना चाहिए। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के हर पहलू पर आप पक्षपात दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के हर पहलू पर आप पक्षपात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी कर्नाटक में कहते हैं कि कर्नाटक के मतदाता भाइयों-बहनों बजरंगबली का नाम लो और भाजपा का बटन दबा दो। यह मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में आता है या नहीं ? हर भाषण में मुसलमान, श्मशान, कब्रिस्तान, हिंदुस्तान, पाकिस्तान क्या यह मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में नहीं आता? पुलवामा के शहीदों के नाम पर राजस्थान में वोट मांग रहे हैं और उनको नोटिस तक नहीं दिया गया क्या यह पक्षपात नहीं है ? महाराष्ट्र में दल बदल हुआ। सामान्य तौर पर जब पार्टी का विभाजन होता है तो उसे पार्टी के सिंबल को फ्रीज कर दिया जाता है लेकिन वहां पर शिवसेना का चुनाव चिन्ह शिंदे जी को दे दिया और एनसीपी का चुनाव चिन्ह अजीत पवार को दे दिया। क्या यह पक्षपात नहीं है? अशोक लवासा ने सवाल उठाया तो उनके खिलाफ छापे पड़ गए, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दिग्विजय ने कहा- डायरेक्ट कैश बेनीफिट ट्रांसफर की योजना के बारे में विचार करना चाहिए। चुनाव के दौरान तेलंगाना, तमिलनाडु में चुनाव आयोग ने रोक दिया लेकिन बिहार में उन्होंने यहां तक वोटिंग के दिन तक पैसा बांटा गया है। एंटी-डिफेक्शन लॉ की बात है। हमारे विधायकों को तोड़-तोड़कर उन्होंने सरकारें बना ली। लेकिन दल बदल कानून लागू नहीं हुआ, जो पार्टी से दगा करके जाता है। उसको 6 साल तक के लिए चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए। ‘नरेंद्र मोदी, अमित शाह को भी झूठा प्रमाण पत्र देना पड़ता है’ दिग्विजय सिंह बोले- रजिस्ट्रेशन ऑफ पॉलिटिकल पार्टी की बात करता हूं। 2663 रिकोग्नाइज्ड पार्टी हैं। क्या मजाक बना रहा है? इसमें कठोरता से एक्शन लेना चाहिए। मनी पावर की तो हद हो गई है। जिस प्रकार से मनी पावर का उपयोग हो रहा है। हम पर झूठ बात करने के लिए बात किया जाता है। कौन से लोकसभा चुनाव 70 लाख में पूरा हो जाता है? यहां तक कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह को भी झूठा प्रमाण पत्र देना पड़ता है। कौन सा चुनाव खर्च केवल 70 लाख रुपए में होता है? इस पर सीलिंग को हटाया जाना चाहिए। मैं तो यह भी कहता हूं कि सुपर रिच टैक्स लगाए जाना चाहिए, इसकी आवश्यकता है। नेशनल इलेक्शन फंड की आवश्यकता है। जिसका बंटवारा जिसके पास जितना वोट ऑफ परसेंटेज आया। उसके हिसाब से वितरण कर दिया जाना चाहिए। दिग्विजय सिंह बोले- वीवीपैट की स्लिप वोटर के हाथ में दे दो ईवीएम के बारे में मैं शुरू से कहता आ रहा हूं। मैं बेलेट पेपर के पक्ष में हूं लेकिन अगर बैलेट पेपर का इतना ही विरोध है और ईवीएम से मोदी जी को इतना ही प्रेम है तो मेरा एक ही निवेदन है कि आप वीवीपैट की स्लिप वोटर के हाथ में दे दो। आप वीवी पैट की पर्ची 7 सेकेंड के लिए हमें दिखाते हैं और डब्बे में गिरा देते हैं, वह पर्ची हमें हाथ में दे दीजिए। हम उसे देखकर और फोल्ड करके डब्बे में डाल देंगे। उसकी गिनती होनी चाहिए, नितिन नीतीश कुमार ने इसकी खुद ही मांग की थी। वीवीपैट की 100% काउंटिंग होना चाहिए। लेकिन ये लोग गलत बात कहते हैं कि इसमें बहुत समय लगेगा, बिल्कुल समय नहीं लगेगा। मैं तो स्टॉप वॉच से देखा है कि जो आखिरी पांच राउंड के काउंटिंग होती है। स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग टेबल तक जाने में 47 मिनट लगते हैं। यह कहां लिखा है कि 15 टेबल की काउंटिंग होनी चाहिए। आप 50 टेबल कर दीजिए, 7 घंटे में पूरी काउंटिंग हो जाएगी। वन नेशन वन इलेक्शन हमारे फेडरल स्ट्रक्चर का अपमान है। यह भारत विविधता में एकता भारत की शक्ति है। वन नेशन वन इलेक्शन से आप उसे तबाह करने जा रहे हैं। यह फास्टेस्ट डिक्टेटरशिप का एक रास्ता खोल रहे हैं। मैं डिलिमिटेशन के बारे में भी कहना चाहता हूं। उत्तर भारत और दक्षिण भारत के, जो जनसंख्या अनुपात में फर्क है। उसके आधार पर नहीं होना चाहिए। डिलिमिटेशन जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि मौजूदा अनुपात, जो दक्षिण भारत की सीटें है और उत्तर भारत की सीट हैं। उसी अनुपात से डिलिमिटेशन होना चाहिए।


