राजस्थान के 922 सरकारी स्कूलों में अब साइंस लेब बनेगी। फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी लेब के लिए न सिर्फ कमरे तैयार होंगे, बल्कि अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद भी होगी। जिन स्कूलों में लेब के लिए बजट जारी किया गया है, उनमें सर्वाधिक स्कूल राजधानी जयपुर के 82 स्कूल हैं, जबकि सबसे कम पांच स्कूल सवाई माधोपुर के हैं। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह जिले कोटा में संभागीय मुख्यालय होते हुए भी महज 23 स्कूलों में ही लेब बनने जा रही है। राजस्थान काउंसिल ऑफ स्कूल एज्यूकेशन ने प्रदेश के इन स्कूलों में लेब बनाने के लिए पांच सौ सात करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। इस बजट से राज्यके 722 स्कूलों में फिजिक्स लेब, 718 स्कूलों में केमेस्ट्री लेब और 816 स्कूलों में बायोलॉजी लेब तैयार होगी। इनके लिए लेब का कमरा बनाने का बजट भी शामिल है। इसके अलावा उपकरणों की खरीद भी इसी राशि से होगी। फर्नीचर, बिजली व पानी कनेक्शन के लिए भी प्रत्येक लेब का अलग अलग बजट दिया गया है। प्रत्येक लेब के लिए 22 लाख पचास हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें किसी स्कूल में एक लेब बन रही है तो किसी स्कूल में दो लेब बनेगी। कुछ स्कूलों में तीनों विषयों की लेब बननी है। सबसे ज्यादा जयपुर के स्कूल प्रदेश में सबसे ज्यादा जयपुर के 82 स्कूल है। वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह जिले में महज 23 स्कूलों में लेब के लिए बजट जारी हुआ है। जयपुर के बाद सबसे ज्यादा कोचिंग सिटी सीकर में 61 स्कूलों में साइंस लेब बनने जा रही है। सीकर में कोचिंग बढ़ने के बाद सरकार ने भी यहां बड़ी संख्या में स्कूलों में साइंस विषय शुरू कर दिए। इससे भी यहां लेब की आवश्यकता ज्यादा रही। निदेशालय को सूचना तक नहीं राजस्थान काउंसिल ऑफ स्कूल एज्यूकेशन ने ये बजट जारी किया है। जिन स्कूलों को बजट दिया गया है, वो माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधीन संचालित है। इसके बाद भी बजट स्वीकृति में शिक्षा निदेशालय को सूचना नहीं दी गई है। किस जिले में कितनी लेब


