राज्य में निजी स्कूल, यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल खोलना होगा अब आसान, पर्यटन को भी बढ़ावा

झारखंड में निजी क्षेत्र के तहत स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालय खोलने के लिए बड़ी सहूलियत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही हॉस्पिटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े नियमों में भी कई तरह की छूट दी जा सकती है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्देश्य है कि निवेश को बढ़ावा मिले और विकास से जुड़े कार्यों में अनावश्यक बाधाएं कम हों। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत डी-रेगुलेशन फेज-2 के कई सुझावों को लागू करने की तैयारी चल रही है। इसी क्रम में बीते बुधवार को राज्य सरकार के विभागीय सचिवों ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्रालय के विशेष सचिव केके पाठक के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। इस टास्क फोर्स की बैठक के बाद शुक्रवार को भी कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बेस्ट प्रैक्टिस को लेकर हुए मंथन में हिस्सा लिया। इस वर्ष जनवरी माह में लागू डी-रेगुलेशन फेज-2 के तहत भारत सरकार ने सात प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता के रूप में तय किया है। इसके तहत नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव और कटौती की जानी है। स्वास्थ्य: एनओसी-रजिस्ट्रेशन में राहत हेल्थ केयर सेक्टर में भी कई शर्तों को आसान बनाने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने दूसरे राज्य से एनओसी लेने की व्यवस्था खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत एक बार राष्ट्रीय स्तर पर निबंधन होने के बाद राज्य से अलग से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर, नर्स और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के लिए अभी स्टेट मेडिकल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। नेशनल मेडिकल रजिस्ट्रेशन के बाद भी दूसरे राज्य में काम करने के लिए राज्य से एनओसी लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया को सरल और तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शिक्षा: जमीन की शर्त खत्म होगी शिक्षा क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालयों और निजी स्कूल-कॉलेजों के लिए भूमि नियमों, परिसर मानकों और अनिवार्य फंड से जुड़े प्रावधानों में छूट देने की तैयारी है। अभी निजी क्षेत्र में स्कूल खोलने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 1 एकड़ और शहरी क्षेत्रों में 75 डिसमिल जमीन अनिवार्य है। अब इन नियमों में बदलाव करते हुए जमीन की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि जमीन की उपलब्धता लगातार घट रही है। इसलिए वर्टिकल भन निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। मल्टी-स्टोरी भवनों में क्लासरूम, लाइब्रेरी और लैब संचालित किए जा सकते हैं। पर्यटन… होम-स्टे नियम होंगे सरल: पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे व्यवस्था में बदलाव की तैयारी है। एक घर में अधिकतम आठ कमरों को होम-स्टे के रूप में संचालित किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्वयं भोजन बनाने की सुविधा देने पर भी विचार हो रहा है। अभी होम-स्टे के लिए वही मकान मालिक पात्र होते हैं, जो स्वयं उस घर में रहते हों। अब प्रस्ताव है कि मकान मालिक वहां न रहते हुए भी अपने घर को होम-स्टे के रूप में उपलब्ध करा सकेंगे। इससे रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *