भास्कर संवाददाता | पाली बस यात्रियों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने शनिवार को वीसी में बड़ा फैसला लिया। अब राजस्थान में नॉन-एसी स्लीपर बसें पूरी तरह बंद होंगी। केवल एसी स्लीपर बसों को ही संचालन की अनुमति मिलेगी। आग लगने जैसी आपात स्थितियों में यात्रियों की त्वरित निकासी सुनिश्चित करने के लिए बस बॉडी कोड को सख्ती से लागू किया है। नए नियमों में बसों की डिजाइन, इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और आंतरिक संरचना में बदलाव किए हैं। परिवहन विभाग के राज्य सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ की ओर से शनिवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उप परिवहन आयुक्त डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि 12 मीटर लंबी एसी स्लीपर बसों में चार इमरजेंसी गेट और छत पर दो एस्केप हैच अनिवार्य होंगे। इससे आग लगने की स्थिति में यात्रियों को एक मिनट के भीतर बस से बाहर निकालना संभव होगा। साथ ही बसों से लगेज कैरियर हटाने के निर्देश दिए हैं। क्योंकि इससे बस का सेंटर ऑफ ग्रेविटी बिगड़ता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ता है। वीसी में प्रदेशभर से 400 परिवहन अधिकारी, कर्मचारी, बस बॉडी बिल्डर्स, बस निर्माता और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में बसों से चर्चा की गई। पाली डिपो में 44रूटों पर 49 बसें है, 43एक्सप्रेस, 4 एसी, 2स्लीपर नॉन एसी बसें हैं। डॉ. राठौड़ ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी बस में ड्राइवर केबिन अलग नहीं होगा और सभी बसों में फायर डिटेक्शन व फायर सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य रहेगा। {बैठक में चार प्रकार की बसों : टाइप-1 (शहरी), टाइप-2 (शहर से शहर), टाइप-3 (लंबी दूरी डीलक्स), टाइप-4 (एसी व स्कूल बस) के लिए बॉडी कोड की जानकारी दी गई। {एआईएस-052 सभी बसों पर सामान्य सुरक्षा मानक अनिवार्य एआईएस-063 स्कूल बस के लिए एआईएस-119 एसी स्लीपर बसों के लिए {एआईएसः 153 फायर डिटेक्शन सभी बसों पर लागू {एसी स्लीपर बसों में स्लाइडर गेट लगाने की अनुमति नहीं होगी। इसके बदले हर सीट पर एक आपातकालीन हथौड़ा रखना अनिवार्य होगा। इससे यात्री शीशा तोड़कर बाहर निकल सकें। {ड्राइवर और कंडक्टर सीट के पास बड़ा हथौड़ा भी रखा जाएगा। {एसी स्लीपर बसें ऐसी होगी कि यात्रियों का सिर छत से न टकराए। दोनों तरफ की बर्थ के बीच का गैंग-वे 550 एमएम चौड़ा रहेगा।


