राज्य सरकार मार्च के पहले सप्ताह में बजट (वित्तीय वर्ष 2025-26) पेश करेगी। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का यह पहला बजट होगा। राज्य के अधिकारी बजट तैयारी में तेजी से जुटे हुए हैं। इस लेकर वित्त सचिव प्रशांत कुमार जनवरी के पहले सप्ताह से स्थापना खर्च बजट को लेकर विभागों के साथ समीक्षा बैठक शुरू करेंगे। अलग-अलग विभागों के साथ होने वाली ये बैठकें लगभग एक सप्ताह तक चलेंगी। इनमें बजट मांग पत्र के अनुसार विभागों ने प्रस्ताव दिए हैं या नहीं, इसकी समीक्षा होगी। साथ ही, जिन विभागों ने वेतन और दूसरे मद में राशि बढ़ाने या घटाने की मांग की है, उस पर भी चर्चा होगी। वित्त विभाग ने सभी विभागों को 11 दिसंबर तक हर हाल में स्थापना खर्च के लिए मांग पत्र भेजने को कहा था। पेयजल व आपदा प्रबंधन विभाग को छोड़कर लगभग सभी विभागों ने मांग पत्र दे दिया है। योजना : मंईयां योजना के लिए राशि आवंटन इधर, योजना बजट की तैयारी पर भी काम चल रहा है। राज्य सरकार के लिए इस बार मंईयां योजना, फ्री बिजली और खाली पदों पर नियुक्तियों के लिए राशि जुटाना बड़ी चुनौती है। योजना विभाग के प्रधान सचिव मस्तराम मीणा ने पहले ही अगले वित्तीय वर्ष के लिए 7 जनवरी तक सभी विभागों को योजनाओं के लिए राज्य योजना आलेख भेजने को कहा है। सारे आलेख आ जाने के बाद विकास आयुक्त की अध्यक्षता में विभागीय प्रधानों की बैठक होगी, जिसमें लिए निर्णय के आधार पर विभागवार योजना बजट तय होगा। बजट बनाने से पहले सरकार विभिन्न विभागों, हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करेगी। उसमें राज्य की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर मंथन होगा। स्थापना बजट की रूपरेखा तय होने के बाद योजना बजट की मांग पत्र पर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक होगी। चालू योजना: पिछले कार्यों के लिए प्रावधान दिशा : किसानों-महिलाओं पर होगा फोकस जनवरी के पहले सप्ताह से स्थापना खर्च बजट को लेकर विभागों के साथ समीक्षा बैठक राज्य स्कीम के तहत पहले चालू वित्तीय वर्ष की वैसी स्कीम को लिया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार की वचनबद्ध दायित्व (कमीटेड लाइबलिटी) है। जिन योजनाओं में पिछले वर्षों में कार्य कराए गए हैं, और अवशेष कार्य कराए जाने हैं, उनके लिए पर्याप्त प्रावधान होगा। इसके बाद ही नई स्कीम को शामिल होगा। राज्य स्कीम में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि राशि का व्यय ज्यादा से ज्यादा पूंजीगत निर्माण पर हो। राज्य को विकास की पटरी पर आगे बढ़ाने और चुनाव के दौरान किए घोषणाओं को पूरा करने में आपसी संतुलन की स्थिति तैयार करना सरकार पर एक बड़ा दायित्व रहेगा। अतिरिक्त डीबीटी योजनाओं से खजाने पर बढ़ने वाला बोझ का उपाय करना है। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 1 लाख 29 हजार करोड़ रुपए का मूल बजट है। इसमें 79783 करोड़ रुपए का योजना बजट है। राज्य सरकार के बजट में किसानों, महिलाओं, युवाओं और अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक वर्गों के लिए विशेष योजनाओं को केंद्रित करने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि इस बार का बजट राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, रोजगार और उद्योग के क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, राज्य में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न वित्तीय सहायता, सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाओं के लिए भी बजट में बड़ा हिस्सा हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, बजट प्रस्ताव को मुख्यतः चार भागों में बांटा गया है। इनमें राजस्व प्राप्तियां, स्थापना व्यय, राज्य स्कीम को केंद्रीय सहायता, केंद्रीय योजनागत योजना और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए केंद्रांश एवं राज्यांश का प्रावधान रहेगा। विकास के लिए किए जाने वाले सभी व्यय सामान्य बजट में शामिल किए जाएंगे।


