अगर आप रात में एसी या स्लीपर बस से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। मप्र में ऐसी 27 लंबी दूरी की यात्री बसें पकड़ी गई हैं, जिनमें आग लगने की स्थिति में यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने के इंतजाम ठीक नहीं थे। इन सभी बसों को जब्त कर उनके परमिट निरस्त कर दिए गए हैं। आगे इनका रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल हो सकता है। रायसेन में 13 जनवरी की रात चलती बस में आग लगने की घटना के बाद परिवहन विभाग हरकत में आया। बुधवार रात 11 बजे प्रदेशभर में आरटीओ व फील्ड अफसर अचानक सड़कों पर उतरे। यह कार्रवाई रात 3 बजे तक चली। इस दौरान इंदौर में 9, उज्जैन में 7, सागर में 5 व जबलपुर में 3 समेत कुल 27 बसें सुरक्षा मानकों पर फेल पाई गईं। कई बसों में इमरजेंसी गेट या तो बंद थे या सिर्फ दिखावे के लिए लगे थे। स्लीपर बसों में बर्थ के बीच का गलियारा बहुत संकरा था। कुछ बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम खराब मिले, तो कुछ में ये उपकरण नहीं थे। रात 11 बजे सड़क पर उतरे आरटीओ, 4 घंटे में मानकों के खिलाफ चल रहीं 27 बसें जब्त, परमिट निरस्त अब रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल होंगे एआईएस के मानकों की जांच की फील्ड अफसरों ने सभी बसों में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) के मानकों की जांच की है। एआईएस कोड भारत सरकार द्वारा तय किए गए तकनीकी सुरक्षा मानक हैं, जो विशेष रूप से बसों और स्कूल वाहनों की सुरक्षा, संरचना और अग्नि सुरक्षा से संबंधित हैं। बता दें कि अक्टूबर 2025 में राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर चलती एसी बस में लगी भीषण आग में 20 यात्रियों की मौत के बाद बसों के फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए गए थे। तब जारी हुए निर्देश में विभाग ने सभी फील्ड अफसरों को चेतावनी दी थी कि तय सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाली बसों का संचालन तुरंत बंद करवाया जाए। यात्री क्या देखकर तय करें कि बस सुरक्षित है या नहीं? बस में चढ़ते ही देखें- इमरजेंसी एग्जिट खुलता है या नहीं इसलिए खतरनाक होते हैं हादसे


