चिकित्सा:दर्द से परेशान मरीज अंगुली कटवाने पहुंचा एम्स, डॉक्टरों ने माइक्रो ट्यूमर पहचानकर बचाई जान

कभी-कभी बीमारी बड़ी नहीं होती, लेकिन उसका दर्द जिंदगी को नर्क बना देता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला एम्स भोपाल में सामने आया है, जहां महज 1 मिलीमीटर के दुर्लभ ट्यूमर ने 59 वर्षीय मरीज को 13 साल तक असहनीय पीड़ा में जीने को मजबूर कर दिया। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि दर्द से छुटकारा पाने की उम्मीद में मरीज अपनी उंगली कटवाने की मांग लेकर एम्स भोपाल पहुंचा। मरीज इससे पहले देश के कई बड़े अस्पतालों में इलाज करा चुका था। नर्व कंडक्शन टेस्ट, इमेजिंग जांचें, महंगी दवाइयां और यहां तक कि सर्जरी भी हुई, लेकिन दर्द का असली कारण सामने नहीं आ सका। लगातार पीड़ा ने उसे शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ दिया था। क्लिनिकल जांच ने खोला राज एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. गौरव चतुर्वेदी ने मरीज की गहन क्लिनिकल जांच की। जांच के दौरान उन्हें एक दुर्लभ ग्लोमस ट्यूमर की आशंका हुई। आमतौर पर यह ट्यूमर नाखून के नीचे पाया जाता है, लेकिन इस मरीज में यह उंगली के पल्प यानी सिरे के नरम हिस्से में छिपा हुआ था। संदेह पुख्ता होने पर सर्जरी की योजना बनाई गई। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने उंगली के पल्प से सिर्फ 1 मिमी आकार का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। ट्यूमर इतना सूक्ष्म था कि वर्षों तक सामान्य जांचों में पकड़ में नहीं आया। क्यों खास है यह मामला? एचओडी, एम्स में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी के एचओडी डॉ. मनाल मोहम्मद खान के अनुसार ग्लोमस ट्यूमर सामान्यतः नाखून के नीचे पाए जाते हैं। उंगली के पल्प में इनका होना अत्यंत दुर्लभ है, इसी वजह से ऐसे मामलों में सही निदान सालों तक नहीं हो पाता। सर्जरी के तुरंत बाद खत्म हुआ दर्द : सर्जरी के बाद सबसे राहत भरी बात यह रही कि दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया। उंगली को काटने की जरूरत नहीं पड़ी और हाथ की सामान्य कार्यक्षमता पूरी तरह बहाल हो गई। 13 साल तक लगातार दर्द झेलने के बाद जब मरीज ने पहली बार बिना पीड़ा के सांस ली, तो यह उसके लिए नए जीवन जैसा अनुभव था।

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