झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को जिला स्कूल मैदान में दुर्गापूजा की अनुमति दिए जाने के मामले में स्वत:संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पूजा के दौरान व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पूजा समितियों और प्रशासन को अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए सभी निर्देशों का पालन करना होगा। यह निर्देश रांची सहित पूरे राज्य में लागू होगा। अदालत ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को पूजा पंडाल में सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि रात के समय निर्धारित मापदंड से तेज आवाज में लाउडस्पीकर न बजाएं, ताकि ध्वनि प्रदूषण न हो। सभी पूजा पंडालों में स्वच्छता का पालन किया जाना चाहिए। इससे पहले सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथपत्र दाखिल कर कहा गया कि पूजा समाप्त होने के बाद मैदान को पहले जैसा खेल योग्य बना दिया जाएगा। आग से सुरक्षा के लिए 20 अग्निशामक यंत्र लगाए जाएंगे। भीड़ नियंत्रण के लिए 50 निजी सुरक्षाकर्मी और 100 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग प्रवेश व निकास मार्ग होंगे, साथ ही आपात स्थिति के लिए अलग निकास द्वार बनाया जाएगा। स्वच्छता के लिए 20 कर्मी और 40 डस्टबिन की व्यवस्था रहेगी तथा प्रतिदिन तीन शिफ्ट में सफाई होगी। स्कूल के समय और रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं होगा। इसके बाद अदालत ने पूर्व में दिए आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। खनिज ढुलाई में लगे वाहनों से कंपोजिशन यूजर फी लेने को हाईकोर्ट ने बताया असंवैधानिक झारखंड हाईकोर्ट ने खनिज ढुलाई में लगे वाहनों से कंपोजिशन यूजर फी लेने को असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा 2021 में जारी किए गए कंपोिजशन यूजर फी अवैध करार देते हुए इस पर रोक लगा दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा लगाया गया यह शुल्क टोल टैक्स के रूप में नहीं गिना जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकार के पास कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार ने लेवी ऑफ टोल्स एक्ट, 1851 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया था। यह एक्ट राज्य को केवल उन सड़कों और पुलों पर शुल्क वसूलने की अनुमति देता है, जो राज्य सरकार ने अपने खर्च पर बनाए या मरम्मत किए हों। चूंकि राज्य ने उन सड़कों और पुलों की पहचान नहीं की, जिन पर यह शुल्क लागू किया जाना था। इसलिए अदालत ने इस नियम को असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में बनाई जाने वाली सड़कों पर शुल्क वसूलने का अधिकार भी नहीं रखती है। क्योंकि यह शुल्क केवल उन सड़कों पर ही लागू हो सकता है जो पहले से निर्मित या मरम्मत किए गए हों। इसलिए, राज्य सरकार का यह तर्क कि वह भविष्य में बनने वाली सड़कों पर भी शुल्क वसूल सकती है, को नकारा गया। अदालत ने कहा कि कंपोजिशन यूजर फी का भुगतान कर चुके लोगों की फीस अन्य देनदारी में समायोजित की जाए।


