जैसलमेर जिले के रामगढ़ कस्बे में डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड को खनन के लिए आवंटित भूमि का मामला अब गरमाता जा रहा है। तहसील कार्यालय के समक्ष ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच, धरना स्थल पर लगे पोस्टर फाड़े जाने की घटना ने स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, जिस पर थानाधिकारी ने निष्पक्ष जांच और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया। पोस्टर फाड़ने पर रोष, पुलिस ने दिया सुरक्षा का भरोसा बीती रात अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा धरना स्थल पर लगे पोस्टरों को फाड़ने के बाद शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल, जिसमें कुन्दनलाल, सुलेमान खान और कन्हैयालाल भार्गव शामिल थे, ने थानाधिकारी भुटाराम को लिखित रिपोर्ट सौंपी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, जिस पर थानाधिकारी ने निष्पक्ष जांच और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया। गौरतलब है कि रामगढ़ इलाके में डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड को खनन आवंटन किया गया है जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। विकास बनाम जनहित का मुद्दा एक ओर जहां कंपनी द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना से औद्योगिक निवेश की उम्मीद की जा रही है, वहीं ग्रामीणों ने इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का मुख्य विरोध निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है: आंदोलन की दिशा और प्रशासन का पक्ष धरने पर बैठे सुनील कुमार, अजयपालसिंह और जगतपाल कुमावत ने स्पष्ट किया कि जब तक भूमि आवंटन निरस्त नहीं होता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। ग्रामीणों का तर्क है कि यह परियोजना उनके संवैधानिक अधिकारों और शांतिपूर्ण जीवन का उल्लंघन है। फिलहाल, प्रशासन इस मामले में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। तहसील प्रशासन और पुलिस की नजरें आंदोलन की गतिविधियों पर बनी हुई हैं ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस आवंटन की समीक्षा करे और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे।


