रामानुजगंज | सितंबर का महीना शुरू होते ही रामानुजगंज की गलियों में एक बुजुर्ग की बुलंद आवाज गूंजने लगती है सिंघाड़ा ले लो। यह आवाज 80 वर्षीय रामबचन सोनी की है, जो अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और जोश से युवाओं को भी प्रेरित कर रहे हैं। अंबिकापुर निवासी रामबचन कई वर्षों से रामानुजगंज में सिंघाड़ा बेचने आते हैं। एक आंख से दृष्टिहीन और मुंह में दांत न होने के बावजूद उनकी तेज आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है। सितंबर से नवंबर तक वे पूरे सरगुजा संभाग में घूम-घूमकर सिंघाड़ा बेचते हैं, जबकि बाकी महीनों में सीजनल फल बेचकर आजीविका चलाते हैं। रामानुजगंज में वे किराए का ठेला लेकर मोहल्लों की गलियों में घूमते हैं और केवल सिंघाड़ा ही नहीं बेचते, बल्कि उसके स्वास्थ्य लाभ भी ग्राहकों को बताते हैं। उनका बोलने का अंदाज इतना असरदार होता है कि अनजान लोग भी उनसे खरीदारी करने को मजबूर हो जाते हैं। रामबचन सुबह से देर शाम तक मेहनत करते हैं। उ


