भास्कर न्यूज | अमृतसर पांच साल से संरक्षण के लिए तरस रहे रामबाग गेट को नगर निगम जल्द संवारने जा रहा है। इसके आसपास के एक किलोमीटर एरिया को हेरिटेज रूप में बदला जाएगा। इस पर निगम करीब 10 करोड़ रुपए खर्च करेगा। पांच साल पहले इस गेट को निगम ने 6.50 करोड़ रुपए खर्च करके संरक्षित किया था, ताकि टूरिस्ट इसकी भव्यता को देख सकें। मगर सरंक्षण कार्य होने के कुछ महीने के बाद ही इसे बंद कर दिया गया । इसके बाद से ही रंग–रूप खराब होना शुरू हो गया था और अब यह बदहाल स्थिति में है। निगम ने इसका फिर से संरक्षण कराने का प्रस्ताव चंडीगढ़ भेजा है। निगम अधिकारियों के अनुसार सब ठीक रहा तो काम जल्द शुरू हो जाएगा। रामबाग गेट को महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में बाकी 12 गेटों और बाउंड्री वाल के साथ ही तैयार किया गया था। अंग्रेजों के शासनकाल में इस दीवार की ऊंचाई कम कर दी गई थी। साथ ही नुकसान भी पहुंचा। 2005 में ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित करने की कवायद शुरू हुई थी। रामबाग के संरक्षण के लिए यूनिवर्सिटी, सेंट्रल एशियन म्यूजियम और नगर निगम ने मिलकर काम किया। वर्ष 2019 में गेट पर पूरी तरह से संरक्षण किया गया। यूनेस्को टीम ने 2023 में इसे सराहा था। मगर उस वक्त तक बंद रहने के कारण इसकी हालत खराब हो चुकी थी। संरक्षित भाग में दरारें आने लगीं थी। रख-रखाव में लापरवाही की वजह से यह खस्ताहाल हो गया था। रामबाग (कंपनी बाग) में ठहरने के बाद महाराजा रणजीत सिंह इसी रास्ते से दरबार साहिब माथा टेकने जाया करते थे। हकीकत में यह गेट का एक पिलर है, जिसमें सैनिकों के रहने तथा नीचे घोड़ों को बांधने की व्यवस्था होती थी। इसके सामने भी इसी तरह का पिलर हुआ करता था, जिसमें बाद में थाना बनाया गया और अब यह खत्म हो गया है।


