रामलीला महोत्सव : त्याग, आज्ञापालन और सामाजिक समता का संदेश दिया

सूमर| कस्बे के समीप कंवरपुरा मंड स्थित हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे श्रीरामलीला महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार को रामकथा के अत्यंत मार्मिक एवं शिक्षाप्रद प्रसंगों का मंचन किया। काशी वाराणसी (उत्तरप्रदेश) से आए प्रसिद्ध कलाकारों ने दशरथ–मंथरा–कैकयी संवाद, श्रीराम वनवास एवं केवट संवाद को जीवंत अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंचन के दौरान मंथरा द्वारा कैकयी को भ्रमित करना, कैकयी द्वारा वरदान मांगना तथा राजा दशरथ की विवशता ने यह स्पष्ट किया कि स्वार्थ और कुटिल सलाह परिवार व समाज के लिए पीड़ा का कारण बनती है। श्रीराम द्वारा वनवास स्वीकार करना, आज्ञापालन और त्याग का श्रेष्ठ उदाहरण रहा, जबकि केवट संवाद ने भक्ति में समानता और निष्काम सेवा का संदेश दिया। इन प्रसंगों ने दर्शकों को बोध कराया कि जीवन में धर्म, सत्य और कर्तव्य का पालन ही वास्तविक मर्यादा है। इस अवसर पर संचालक कमलेश द्विवेदी एवं व्यवस्थापक पं. अमरेश पाण्डेय ने बताया कि रामलीला का उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कार, कर्तव्य बोध और भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति, युवा एवं बुजुर्ग उपस्थित रहे।

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