राम-नाम के जाप की गूंज से ऐसा लगा जैसे अयोध्या नगरी लुधियाना में उतर आई हो

भास्कर न्यूज | लुधियाना शहर में हित पारस महाराज के पावन सानिध्य में सनातन एकता पदयात्रा का आयोजन हुआ। दोपहर ठीक 1:30 बजे जगराओं पुल स्थित प्राचीन श्री दुर्गा माता मंदिर से यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा के शुरूआत में सबसे पहले सामूहिक रूप से राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ का गायन किया गया जिसने भक्तों में अटूट देशभक्ति का संचार कर दिया। इसके बाद ‘नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के साथ यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ी। इस दौरान शहर में जय श्री राम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। आकाश से लेकर धरती तक लुधियाना का कोना-कोना केसरी आभा से दीप्तिमान नजर आया। पूरे यात्रा मार्ग पर राम-नाम के भजनों की मधुर गूंज सुनाई देती रही। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था। मानो साक्षात अयोध्या नगरी लुधियाना की सड़कों पर उतर आई हो। भक्तों की टोली राम-नाम की ध्वनि में मग्न होकर झूम रही थी। इस यात्रा की महिमा तब और बढ़ गई जब भारत की प्रथम महिला शंकराचार्य त्रिकाल भवन्ता सरस्वती महाराज सहित देशभर के दिग्गज संतों का पदार्पण हुआ। महिला शंकराचार्य ने इस मंच से समस्त सनातनी समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने भारत माता की जय के नारों के साथ मानवता और एकता का ऐसा दिव्य संदेश दिया, जिसने प्रत्येक श्रद्धालु के भीतर नई चेतना का संचार कर दिया। महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज, संजीव गुरु, बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर, विवेक नाथ महाराज, पूनम संत और प्रयागराज से आए अभिषेक संत जैसे संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने भक्तों को भक्ति के एक सूत्र में पिरो दिया। यात्रा में हजारों महिलाएं हाथों में राम-नाम की ध्वजा लिए चल रही थी। फाउंटेन चौक में यात्रा का भव्य स्वागत पुष्प-वर्षा से हुआ। इसके बाद आरती चौक में श्री युगल सरकार की दिव्य आरती उतारी गई। जिससे भक्तों के हृदय भाव-विभोर हो उठे। हित पारस महाराज ने पांच प्रमुख संकल्पों का आह्वान किया। उन्होंने युवा पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के कुचक्र से निकालकर दोबारा संस्कारों की मुख्यधारा से जोड़ने पर बल दिया। यात्रा का विश्राम नवदुर्गा मंदिर सराभा नगर में हुआ। जहां भक्तों ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे सनातन एकता की इस ज्योति को घर-घर पहुंचाएंगे।

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