रायगढ़ में 15 घंटे से बारिश…केलो-डैम के 4 गेट खुले:सड़क पर कमर तक भरा पानी, कोरबा-जशपुर समेत 13 जिलों में अलर्ट,आंधी चलेगी; बिजली गिरेगी

रायगढ़ जिले में पिछले 15 घंटे से हो रही बारिश के बाद केलो डैम के 4 गेट खोल दिए गए हैं। इससे केलो नदी का जल स्तर बढ़ गया है। कई नदी-नाले उफान पर है। कोंडकेल तिराहे वाली सड़क पर कमर तक पानी बह रहा है। बिलासपुर में भी सुबह से पानी बरस रहा है। बता दें कि अगले 3 दिन सरगुजा और बिलासपुर संभाग के एक दो स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने आज कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, जशपुर, बलरामपुर, सरगुजा इन छह जिलों में भारी बारिश, बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं रायपुर, बलौदाबाजार, बिलासपुर, जीपीएम, कोरिया, सूरजपुर और मुंगेली इन 7 जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का यलो अलर्ट है। दक्षिणी हिस्से में मौसम सामान्य रहेगा। पिछले 24 घंटों में सभी संभागों के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हुई। तापमान की बात करें तो गुरुवार को सबसे अधिक तापमान 32.5°C दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.0°C दुर्ग में दर्ज किया गया। सिस्टम कमजोर, बस्तर में कम बरसेगा पानी सिनौप्टिक सिस्टम की बात करें तो छत्तीसगढ़ के मध्य भागों और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश में बना लो प्रेशर एरिया कमजोर हो गया है। हालांकि, इससे जुड़ा साइक्लोन सर्कुलेशन दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में एक्टिव है। 1 जून से अब तक 794 मिमी पानी बरसा 1 जून से अब तक प्रदेश में 794 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1148.1 मिमी पानी बरसा है। बेमेतरा में सबसे कम 391.8 मिमी बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिमी बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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