रायपुर नगर निगम ने पिछले एक दशक में अलग-अलग वार्डों के तालाबों पर 10 करोड़ से ज्यादा सिर्फ जलकुंभी हटाने के नाम पर खर्च कर दिए। सौंदर्यीकरण पर करीब 70 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च किए जा चुके हैं। पिछले साल बूढ़ातालाब में जलकुंभी हटाने और गाद निकालने के बड़ा काम किया गया था। इस पर ही करीब 40 लाख रुपए खर्च किए गए। इसी तरह शहर के सबसे बड़े तालाबों में शुमार महाराजबंध और राजातालाब से भी जलकुंभी हटाने के नाम पर रायपुर स्मार्ट सिटी और निगम लाखों रुपए खर्च कर चुका है। राजातालाब पूरी तरह जलकुंभी से अट गया है। पिछले एक दशक में इस तालाब की कई बार सफाई हो चुकी है।
ढाई करोड़ की मशीन से बचेगा खर्च
तालाबों से जलकुंभी साफ करने वाली हार्वेस्टर मशीन खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। महापौर एजाज ढेबर ने बजट में इसका प्रावधान भी किया था, लेकिन यह मशीन नहीं खरीदी जा सकी। अलग-अलग क्षमता और गुणवत्ता के आधार पर डेढ़ से ढाई करोड़ रुपए लागत वाली यह मशीन दो-तीन घंटे में करीब 20 एकड़ तालाब से जलकुंभी हटाने में सक्षम है। यानी हर साल करीब डेढ़ करोड़ का खर्च होगा। यह वर्तमान व्यवस्था से अधिक खर्चीला होगा। इसलिए प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन पाई।
केमिकल ट्रीटमेंट से नुकसान
पं. रविशंकर विवि में एसोसिएट प्रोफेसर डा. शम्स परवेज का कहना है कि जलकुंभी हटाने के दो तरीके हैं। इनमें एक मैनुअल और दूसरा केमिकल ट्रीटमेंट। मैनुअल तरीके में जब भी जलकुंभी उपजती है तो उसे मजदूरों की मदद से निकाल लिया जाता है। किसी तरह का कोई ट्रीटमेंट नहीं किया जाता। दूसरा तरीका होता है केमिकल ट्रीटमेंट। यानी जलकुंभी निकालने का बाद तालाब में एक खास तरह का केमिकल डाला जाता है। इसका नुकसान यह होता है कि तालाब का पानी फिर निस्तार के लायक नहीं रह जाता। इससे जलीय जीव-जतुंओं के जीवन पर भी खतरा रहता है। तालाबों में आने वाले सीवेज वाटर, गंदगी इत्यादि के कारण जलकुंभी खुद ब खुद उपजते हैं। राजातालाब सहित सभी तालाबों से जलकुंभी हटाना एक बड़ी समस्या है। हम जलकुंभी साफ करने वाली मशीन खरीदने का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। मशीन खरीदने के बाद जलकुंभी हटाना आसान हो जाएगा।
– मीनल चौबे, महापौर रायपुर प्रमुख तालाबों पर खर्च


