छत्तीसगढ़ ही नहीं बिहार पटना जैसे बड़े शहरों में प्राइवेट कंपनी के जरिए संपत्ति कर वसूली के फेल फार्मूले को रायपुर में लागू करने की तैयारी है। हालांकि यहां भी बिलासपुर, दुर्ग, रिसाली-भिलाई तथा कोरबा नगर निगमों में भी ये फार्मूला फ्लॉप साबित हो चुका। दुर्ग में दो साल पहले सैकड़ों लोगों से टैक्स वसूलकर प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी भाग गए। बिलासपुर नगर निगम में जिस कंपनी को ठेका दिया गया, उसने पिछले आठ साल में कभी भी टारगेट का 65% से ज्यादा टैक्स वसूल नहीं किया। आखिरकार निगम प्रशासन को पिछले ठेका सिस्टम खत्म करना पड़ा। भिलाई में भी कंपनी बदलना पड़ा। प्राइवेट कंपनियों का टैक्स वसूली रिकार्ड खराब होने के बाद भी निगम प्राइवेट कंपनी के माध्यम से करवाने की घोषणा बजट में कर चुका है। अब इस पर अमल की तैयारी है। फिलहाल निगम स्तर पर कंपनी से अनुबंध के लिए नियम शर्तों का परीक्षण किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अभी लोगों को निगम ऑफिस जाकर या ऑनलाइन सिस्टम से टैक्स अदा करना पड़ता है। प्राइवेट कंपनी को ठेका देने के बाद वसूली एजेंट शहर के घर-घर दस्तक देकर टैक्स वसूलेंगे। कंपनी को निगम की ओर से टारगेट दिया जाएगा। टारगेट पूरा करने के बाद कंपनी को वसूली गई रकम का 7 से 8 प्रतिशत बतौर कमीशन दिया जाएगा। निगम फिलहाल 300 करोड़ के आसपास टैक्स वसूल रहा है। इस रकम पर 7 से 8 प्रतिशत कमीशन दिया गया तो 21 से 28 करोड़ हर साल खर्च होंगे। वसूली ज्यादा होने पर कंपनी को कमीशन भी ज्यादा देना पड़ेगा। निगम का अपना सिस्टम पुख्ता, फिर भी कंपनी पर निर्भर
रायपुर निगम अपने खर्च के लिए आत्मनिर्भर है। कर्मचारियों-अधिकारियों की तनख्वाह के अलावा सभी तरह के खर्चे निगम अपने वसूले गए राजस्व से ही पूरा करता है। पिछले साल निगम ने 285 करोड़ टैक्स वसूला था। टैक्स वसूली के लिए निगम पहले ही कई प्रयास कर चुका है। लोग घर बैठे टैक्स अदा करें इसके लिए ऑनलाइन टैक्स भुगतान शुरू किया गया। इसके लिए वाट्स एप चैट बॉट, क्यूआर कोड, मोर रायपुर एप, पीओएस से आॅनलाइन व कैश भुगतान की सुविधा शुरू की। दो बार पहले भी प्रस्ताव हर बार खारिज
प्राइवेट एजेंसी से टैक्स वसूले का प्रस्ताव इससे पहले दो बार लाया जा चुका है। हर बार इसे खारिज कर दिया गया। पूर्व महापौर प्रमोद दुबे के समय में उस दौरान इसका जमकर विरोध हुआ। कहा गया कि कंपनी के कर्मचारी दिन में कभी भी घर पहुंचकर टैक्स डिमांड करने लगेंगे। घर के पुरुष ड्यूटी पर रहेंगे, तो महिलाएं हैंडल नहीं कर पाएंगी। विवाद की भी नौबत आएगी। निगम को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। चार साल पहले पूर्व मेयर एजाज ढेबर के कार्यकाल में भी यह प्रस्ताव लाया गया था। जांच के बाद लेंगे निर्णय बजट में इसका प्रस्ताव लाया गया है। इसके गुणदोष और सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। हम राजस्व वसूली में वृद्धि की दिशा में काम करना चाहते हैं। रायपुर निगम आत्मनिर्भर हो, यह प्रयास है। – मीनल चौबे, महापौर रायपुर बाकी निगमों में इस तरह फेल हुआ सिस्टम
1. बिलासपुर निगम ने सात साल पहले रांची की प्राइवेट एजेंसी स्पाइयरो साफ्टटेक लिमिटेड को ठेका दिया। यह कंपनी सात साल में कभी टारगेट का 70 प्रतिशत पूरा नहीं कर पाई।
2. दुर्ग निगम अब खुद टैक्स वसूल रहा है। प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों ने सैकड़ों लोगों से टैक्स वसूले लेकिन उसे निगम के खाते में जमा नहीं किया। अभी तक एफआईआर नहीं की गई।
3. भिलाई में पांच साल में दो कंपनी बदली जा चुकी है। कंपनी टारगेट पूरा नहीं कर पा रही। वहां 70 की अपेक्षा महज 30 कर्मचारी रखकर वसूली की जा रही। रिसाली में भी ऐसे ही ठेका रद्द करना पड़ा। बिलासपुर – शासन के निर्देश पर टैक्स वसूलने प्राइवेट कंपनी से अनुबंध किया था। शर्त थी कि कंपनी टारगेट का 90% वसूल करेगी। कंपनी कभी भी 65% से अधिक टैक्स वसूल नहीं पाई। -अमित कुमार, कमिश्नर बिलासपुर दुर्ग – कंपनी के कर्मचारियों ने टैक्स का पैसा खाते में जमा नहीं किया। अब तक करीब 80 लाख की गड़बड़ी का पता चला है। कंपनी के खिलाफ एफआईआर भी कराई जाएगी। -अल्का बाघमार, महापौर दुर्ग


