रायसेन में नगर पालिका ने नागरिकों को शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक नई पहल की है। अब सरकारी तंत्र के साथ-साथ शहर की महिलाएं भी घर-घर जाकर पानी की शुद्धता की जांच करेंगी। इस मुहिम के तहत, ‘अमृत 2.0’ योजना के अंतर्गत सांची मार्ग स्थित नगर पालिका कार्यालय के सभा कक्ष में गुरुवार को एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। कार्यशाला में शहर के विभिन्न वार्डों से आईं स्व-सहायता समूह की महिलाओं और पेयजल सप्लाई व्यवस्था से जुड़े लाइनमैनों ने भाग लिया। सिटी मिशन मैनेजर रानी तिवारी की उपस्थिति में पीएचई विभाग के विशेषज्ञों ने महिलाओं को पानी की जांच करने की बारीकियों से अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान, मास्टर ट्रेनर्स ने महिलाओं को ‘फील्ड टेस्टिंग किट’ का उपयोग करके पानी में मौजूद अशुद्धियों का पता लगाने का तरीका सिखाया। उन्हें पानी में फ्लोराइड, नाइट्रेट की मात्रा, बैक्टीरिया का स्तर, पीएच मान और क्लोरीनीकरण की स्थिति जैसे सभी मानकों की जांच करना सिखाया गया। यदि किसी क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता मानक स्तर से कम पाई जाती है, तो इसकी रिपोर्ट तुरंत नगर पालिका को दी जाएगी ताकि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। अमृत 2.0 मिशन का लक्ष्य हर घर तक न केवल पानी पहुंचाना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वह पानी पीने योग्य हो। सिटी मिशन मैनेजर रानी तिवारी ने बताया कि प्रत्येक वार्ड में महिलाओं की एक टीम बनाई जाएगी। ये महिलाएं न केवल पानी की जांच करेंगी, बल्कि नागरिकों को जल संरक्षण और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक भी करेंगी।


