रायसेन के बनगवां गांव के किसान डॉ. योगेश पटेल ने नौकरी की बजाय अपनी खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया। आज वे जैविक और मल्टी-क्रॉप सब्जी खेती के जरिए चार एकड़ जमीन से सालाना 11-12 लाख रुपए तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। वे पेशे से पशु चिकित्सक हैं। डॉ. योगेश पटेल ने अपने खेत में मल्टी-लेयर वेजिटेबल क्रॉपिंग सिस्टम अपनाया है। यही नहीं वे गांव के लोगों से एक रुपए प्रति किलो के भाव से गोबर खरीद कर गोबर गैस भी तैयार कर रहे हैं। इस गोबर गैस से गर्मी के दिनों में जब बिजली नहीं होती है, तब जनरेटर चलाकर अपने खेतों की सिंचाई भी करते हैं। गोबर से जैविक खेती और ग्रामीणों को दिला रहे फायदा
किसान डॉ. योगेश पटेल ने अपने खेत पर गोबर गैस प्लांट बनाया है। उसे नियमित रूप से चलाने के लिए उन्होंने ग्रामीणों से 1 जनवरी 2025 से 1 रुपए प्रति किलो के भाव से गोबर खरीदना शुरू किया है। इससे गांव के लोगों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने लगा है। गोबर के बदले तुरंत नकद भुगतान किया जा रहा है। जिससे लोग खुद अपने साधनों से भी गोबर लाकर बेच रहे हैं। गोबर से बायो गैस बनाई जा रही है, जिसकी स्लरी को आधा इंच पाइपलाइन के माध्यम से बोरवेल मोटर से जोड़कर स्प्रिंकलर द्वारा खेत के सभी पौधों तक पहुंचाया जाता है। इसी स्लरी और गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार की जाती है, जिसे 10 रुपए प्रति किलो के भाव से बेचते हैं। जैविक सब्जियों की बढ़ रही डिमांड
किसान डॉ. योगेश पटेल ने बताया कि 28 एकड़ में से 4 एकड़ में जैविक सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। शेष जमीन में धान, चना और गेहूं की फसल लगाकर उसका उत्पादन ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैविक बैंगन से 6 से 6.5 लाख रुपए (6 महीने में), पत्ता गोभी से 3 से 3.5 लाख रुपए (4 महीने में), धनिया व अन्य सब्जियों से लगभग 2 लाख रुपए की आमदनी हो रही है। खेती में लागत कम रखने के लिए वे आधुनिक मशीनों का उपयोग कर रहे हैं। खेत की तैयारी के लिए बेड मेकर मशीन और निराई-गुड़ाई के लिए मिनी टिलर का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे मजदूरी खर्च नियंत्रित रहता है। 10 से अधिक मजदूरों को मिला रोजगार
डॉ. योगेश पटेल ने अपनी खेती के माध्यम से 10 से अधिक मजदूरों को स्थायी रोजगार भी उपलब्ध कराया है। ये मजदूर खेत में निराई-गुड़ाई, देखरेख और सब्जियों की तुड़ाई का कार्य करते हैं। इससे कम से कम 10 परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। डॉ. योगेश पटेल का यह मॉडल साबित करता है कि यदि जैविक खेती, आधुनिक तकनीक और सही योजना को अपनाया जाए, तो खेती न केवल किसान को समृद्ध बना सकती है, बल्कि गांव में रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार भी तैयार कर सकती है।


