रायसेन में इस सीजन में रात का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। इससे फसलों में पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। हालात को देखते हुए किसान अपनी रबी फसलों को पाले के प्रकोप से बचाने के लिए उपाय कर रहे हैं। पिछले 20 दिनों से जिले में रात का तापमान लगातार 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। वहीं दिन का अधिकतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। पाले से बचाव के लिए किसान रात में खेतों की निगरानी कर रहे हैं और सुबह के समय खेतों में पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि फसलों के आसपास तापमान बना रहे। अगले सप्ताह शीतलहर की संभावना मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल ने आगामी सप्ताह में प्रदेश में शीतलहर और अत्यधिक ठंड पड़ने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, रायसेन ने किसानों को रबी फसलों को पाले से बचाने के लिए समय रहते आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी है। वैज्ञानिक ने समझाया, पाला कैसे पड़ता है कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि शीतलहर के दौरान फसलों की पत्तियां और फूल झुलस जाते हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर और जनवरी में जब रात का तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस या इससे कम हो जाता है, तो फसलों की पत्तियों पर बर्फ की पतली परत जम जाती है, जिसे पाला कहा जाता है। फसलों को पाले से बचाने के लिए खेत में धुआं कर तापमान बढ़ाने, फसलों को कवर करने, पौधों के पास टटिया बांधने और उत्तर-पश्चिम दिशा में शीशम, शहतूत और खेजड़ा जैसे वायुरोधी पौधे लगाने की सलाह दी गई है। सिंचाई और छिड़काव से भी मिलेगा बचाव हल्की सिंचाई करना, फलदार पौधों के तनों पर चूने की सफेदी करना और जमीन पर पुआल या भूसा बिछाना भी प्रभावी उपाय बताए गए हैं। इसके अलावा पौधों में खनिज तत्वों की पूर्ति के लिए घुलनशील सल्फर 200 ग्राम, ग्लूकोज पाउडर 500 ग्राम, थायो यूरिया 500 ग्राम या पोटेशियम सल्फेट (0:0:50) 200 ग्राम को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


