राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 5 मई को शिमला आएंगी:मुख्य सचिव ने तैयारियों को लेकर ली मीटिंग, SPG भी छराबड़ा पहुंची

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 5 मई को शिमला पहुंचेंगी और 9 मई को वापस दिल्ली लौटेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए हिमाचल के चीफ सेक्रेटरी प्रबोध सक्सेना ने आज विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण मीटिंग ली। प्रदेश सचिवालय में संपन्न मीटिंग में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, सड़कों की दुर्दशा सुधारने, पानी और बिजली की उचित व्यवस्था करने से जुड़े निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए। इस मीटिंग में राष्ट्रपति सचिवालय, गृह मंत्रालय, प्रदेश सरकार के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। कुछ अधिकारी दिल्ली से भी वर्चुअली जुड़े। SPG शिमला पहुंची राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा द्रौपदी मुर्मू का दौरा फाइनल करते ही SPG भी शिमला पहुंच गई है। इसके बाद SPG ने छराबड़ा स्थित राष्ट्रपति निवास द रिट्रीट में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है। IIT मंडी परिसर और अटल टनल रोहतांग की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया है। द्रौपदी मुर्मू का कार्यक्रम द्रौपदी मुर्मू 5 मई को शिमला आएंगी। 6 मई को शिमला स्थित सेना प्रशिक्षण कमान आरट्रैक में रखे गए कार्यक्रम में शामिल होगी। 7 मई को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी और 8 मई को अटल टनल रोहतांग जाएंगी। 9 मई को शिमला से वापस दिल्ली लौटेंगी। दिल्ली के अलावा 2 अन्य जगह राष्ट्रपति भवन दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के अलावा भी देश में 2 जगह राष्ट्रपति निवास हैं। एक शिमला के छराबड़ा और दूसरा हैदराबाद में है। शिमला में राष्ट्रपति निवास रिट्रीट के नाम से जाना जाता है। हर बार राष्ट्रपति समर-वेकेशन के लिए शिमला के छराबड़ा पहुंचते हैं और 4 से 6 दिन पहाड़ों में बिताने के बाद वापस दिल्ली लौटते हैं। द्रौपदी मुर्मू भी रिट्रीट की ऐतिहासिक धरोहर में ठहरेंगी। मुर्मू के साथ उनका परिवार भी शिमला आएगा। IIT मंडी के कार्यक्रम की राष्ट्रपति बढ़ाएंगी गरिमा IIT मंडी अपने शैक्षणिक, अनुसंधान और नवाचार में 15 वर्षों की उत्कृष्ट यात्रा पूरी करने पर भव्य आयोजन करने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसमें बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगी। इस आयोजन की थीम उपलब्धियों के 15 वर्ष-सीएफए 2025 रखी गई है। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, उन्नत सामग्री और उद्यमिता जैसे उभरते हुए तकनीकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें विश्वभर के विचारशील नेताओं और शोधकर्ता शामिल होंगे।

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