राष्ट्रपति से सम्मानित संतोष पचार ने प्राकृतिक खेती पर कहा- विकसित बीज चयन विधि ही किसानों की तकदीर बदल सकती है। किसान कृषि विभाग से प्रशिक्षण लेकर खेती के तरीके को बदला जा सकता है। मैंने करीब 20 साल की मेहनत के बाद गाजर के ये खास बीज तैयार किए हैं। इन बीजों से मेरे खेत में तीन फीट तक लंबी गाजर उगती है। इसके लिए मुझे बीज का पेटेंट भी मिला है। पेटेंट से जुड़ी एक मीटिंग में सब लोग अंग्रेजी में बात कर रहे थे। मैंने साफ कह दिया- या तो हिंदी में समझाइए या अनुवाद कीजिए। मैं अंग्रेजी नहीं जानती। इसके बाद पूरी बात हिंदी में हुई और मैंने अपने गाजर के बीज का पेटेंट करवा लिया। साल 2013 में मैं 15 दिन राष्ट्रपति भवन में भी ठहरी थी, उस समय देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे। राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन ने जयपुर स्थित दुर्गापुरा अनुसंधान केंद्र में प्राकृतिक खेती विषय पर 2 दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। सेमिनार में संतोष पचार ने ये बातें कहीं। राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन का परिचय दिया
कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती गठबंधन एवं उसकी राज्य इकाई राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन का परिचय दिया गया। सेमिनार के उद्देश्यों की जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर प्रदेश के उन चयनित किसानों को सम्मानित किया गया, जो पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया सेमिनार के दौरान प्राकृतिक खेती से संबंधित तीन पुस्तकों ‘माटी की पुकार’, ‘प्राकृतिक खेती की कुंजी’ और ‘बीज से लेकर बदलाव तक’ का विमोचन भी किया गया। कार्यशाला के पहले दिन गठबंधन के नेशनल एंकर नरेंद्र नाथ दामोदरन, राज्य इकाई के कोऑर्डिनेटर अभिषेक जैन, प्रदेश भर से जुड़े 39 एनजीओ और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।


