राजस्थान में विप्र कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन में हो रही देरी को लेकर विप्र सेना ने नाराजगी जताई हैं। विप्र सेना के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश बसावतिया ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे सनातन संस्कृति और ब्राह्मण समाज का अपमान बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही बोर्ड को पुनर्गठन कर सक्रिय नहीं किया, तो विप्र समाज सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा। महेश बसावतिया ने कहा- ब्राह्मण समाज सदियों से सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का संरक्षक रहा है। वेद, पुराण, संस्कार, आयुर्वेद, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसी अमूल्य ज्ञान परंपराओं को संजोने वाला यह समाज आज सरकार की अनदेखी के कारण स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार अन्य जातियों और वर्गों के कल्याण बोर्डों को सक्रिय कर रही है, तो विप्र समाज के साथ यह ‘सौतेला व्यवहार’ क्यों किया जा रहा है। विप्र सेना के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश बसावतिया ने कहा कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा राष्ट्र और धर्म को सर्वोपरि रखा है, लेकिन आज उसे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह सरकार की नीतियों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। नाम मात्र का बोर्ड बनाकर खिलवाड़ करने का आरोप
बसावतिया ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत सरकार ने विप्र समाज की भावनाओं के साथ केवल राजनीति की। तत्कालीन सरकार ने विप्र कल्याण बोर्ड का गठन तो किया, लेकिन उसे न तो पर्याप्त बजट दिया गया और न ही कोई निर्णायक अधिकार। इसे मात्र एक नाम की संस्था बनाकर छोड़ दिया गया, जिससे समाज के युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल सका। पुनर्गठन कर इसे संवैधानिक शक्तियों से लैस करने की मांग
विप्र सेना ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की है कि भाजपा सरकार को मिले भारी जनादेश का सम्मान करते हुए विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन कर इसे संवैधानिक शक्तियों से लैस किया जाए। बोर्ड की कमान किसी ऐसे निष्ठावान, अनुभवी और सनातन विचारधारा के समर्पित व्यक्ति को सौंपी जाए, जो समाज की समस्याओं को गहराई से समझता हो। बोर्ड को पर्याप्त वित्तीय बजट आवंटित किया जाए ताकि ब्राह्मण मेधावी छात्रों और जरूरतमंद परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर उतर सकें। बसावतिया ने कहा कि अब विप्र समाज केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट होने वाला नहीं है। उन्होंने आगाह किया कि यदि सरकार ने समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया, तो पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर से लेकर राजधानी तक एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।


