राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस…:बिजली बचाएंगे तभी पर्यावरण बचेगा, एक यूनिट बिजली यानी 1 किलो कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन

भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. चेतन सोलंकी प्रोफेसर आईआईटी बॉम्बे संस्थापक, एनर्जी स्वराज फाउंडेशन सौर ऊर्जा के ब्रांड एंबेसडर (मप्र) बिजली बचत अब केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि जलवायु सुधार की अनिवार्य जरूरत है। घरों या संस्थानों में बचाई गई एक यूनिट लगभग एक किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड (CO₂2) उत्सर्जन के साथ भारी मात्रा में कोयला खनन, परिवहन और वायु प्रदूषण को रोकती है। यदि आज बिजली व्यर्थ की जाती है तो उसका जलवायु पर प्रभाव 300 वर्षों तक बना रहता है, जो वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की अनुमानित आयु है। बिजली बचत करना पर्यावरण के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन रोकने की दिशा में सबसे आसान काम है। क्योंकि इसमें किसी नई तकनीक, नीति परिवर्तन या निवेश की जरूरत नहीं है। बस आवश्यकता है जागरूकता और सजगता की। भारत में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1200–1300 यूनिट है और ये तेजी से बढ़ रही है। बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन कोयले से होने के कारण CO₂2 उत्सर्जन में इसका बड़ा हिस्सा है। वैश्विक स्तर पर भी बिजली उत्पादन केंद्र ग्रीन हाउस गैसों के सबसे बड़े स्रोत है, जो जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण हैं। भारत का पावर फुटप्रिंट बड़ा पर्यावरणीय और आर्थिक चिंता का विषय है। जलवायु परिवर्तन का कारण… बिजली उत्पादन केंद्र ग्रीन हाउस गैसों के सबसे बड़े स्रोत यूं बचा सकते हैं बिजली… दिन में लाइट न जलाएं, पंखे की गति कम करें बिजली बचाना त्याग नहीं… बिजली बचाना त्याग नहीं है। यह समझदारी और बुद्धिमानी से उपयोग करने का तरीका है। संस्थान सरल और व्यावहारिक दिशा‑निर्देश अपना सकते हैं जो तुरंत प्रभावी होते हैं। ये दिशा‑निर्देश अपव्यय कम करने, जागरूकता बढ़ाने और व्यवहार में बदलाव लाने में मदद करते हैं।

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