राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में तांबेसरा के लोहारिया बड़ा में पथ संचलन निकाला गया। इसमें 33 गांवों के 416 स्वयंसेवकों ने देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और अनुशासन का संदेश दिया। पथ संचलन का लोहारिया बड़ा के नवापाड़ा, डूंगलापानी, खड़ियासाथ, छोटा लोहारिया आदि गांवों में वेद मंत्रों के साथ पुष्पवर्षा कर और रंगोली बनाकर स्वागत किया। पथ संचलन में जिला संघचालक विजयसिंह भारत माता की झांकी लेकर चल रहे थे। मुख्य वक्ता गौतमलाल कटारा ने आरएसएस के 99 साल के गौरवशाली इतिहास, पंच प्रण, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, शिष्टाचार आदि विषयों पर सभी का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही देश के सामने वर्तमान में आने वाली चुनौतियों से भी संघ के स्वयंसेवकों को रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि हमें हमार संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को स्मरण करते हुए मावजी महाराज, बिरसा मुंडा, गोविंद गुरु, मामा बालेश्वर दयाल, राणा पूंजा, महाराणा प्रताप, शिवाजी, टांट्या भील, काली बाई, संत रैदास, मीरा बाई, रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों पर चलकर हमारी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखनी है। इसके लिए तन मन धन से कार्य करना होगा। कटारा ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर कुशलगढ़ खंड के संघ चालक कैलाश बारोट आदि भी उपस्थित थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर तांबेसरा उपखंड में पथ संचलन निकाला गया। ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पथ संचलन विद्या निकेतन तांबेसरा से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गों से होते हुए पुनः स्कूल में समापन हुआ। मुख्य वक्ता संघ के सह विभाग ग्रामीण कार्य प्रमुख भरत कुमावत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव राम बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।


