छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 41 जिलों के अध्यक्ष घोिषत कर दिए गए हैं। इन सभी पर अब राहुल गांधी के भरोसे पर खरा उतरने के साथ ही अपने-अपने क्षेत्र के तमाम बड़े नेताओं से सामंजस्य बनाकर पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी। इसके साथ ही 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर पार्टी-संगठन को मजबूत करना जिलाध्यक्षों के लिए सबसे बड़ा टारगेट है। बताया गया है कि नए जिलाध्यक्षों पर अब हमेशा परफार्मेंस की तलवार लटकी रहेगी। क्योंकि इन सबके काम की मॉनिटरिंग राहुल गांधी के दफ्तर से होगी। हर तीन महीने में उन्हें अपनी रिपोर्ट भी देनी होगी कि उन्होंने पार्टी संगठन की मजबूती के लिए क्या किया साथ ही सत्तापक्ष के खिलाफ कौन-कौन से आंदोलन खड़े किए इसका कितना जनमानस पर असर हुआ। इसके आधार पर ही जिलाध्यक्षों का भविष्य तय होगा। अब जरूरी नहीं है कि जिनकी नियुक्ति कर दी गई है वे तीन साल के लिए जमे रहेंगे। अब परफार्मेंस के आधार पर किसी भी जिलाध्यक्ष को कभी भी हटाया जा सकेगा। क्योंकि उसका रिपोर्ट कार्ड ही उसका भविष्य तय करेगा। छह माह पहले बने चार अध्यक्ष हटाए गए दरअसल 41 में से 29 नए चेहरों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है जबकि 12 जिलों के अध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है जबकि छह माह पहले ही बनाए गए चार जिलों के अध्यक्ष को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इनमें नारायणपुर के बिसल नेग, कोंडागांव के बुधराम नेताम, कोरबा शहर के नाथुलाल यादव और बलरामपुर के कृष्ण प्रताप सिंह को खराब परफार्मेंस के कारण हटा दिया गया। नई नियुक्तियों में कांग्रेस के क्षत्रपों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पलड़ा भारी रहा। वे अपने 15 से 20 समर्थकों को जिलाध्यक्ष बनाने में सफल रहे जबकि दीपक बैज, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव अपने आसपास के क्षेत्रों में ही अपने समर्थकों की िनयुक्ति करा पाए। नई नियुक्तियों में ओबीसी वर्ग के 17, 4 एसटी, 5 एससी, 1 अल्पसंख्यक और 15 सामान्य वर्ग के नेताओं को तवज्जो दी गई है। इसी तरह पांच महिलाओं को भी जिलों की कमान सौंपी गई है। ये सबसे बड़ी चुनौती नई टीम की दिल्ली में होगी ट्रेनिंग कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सीनियर लीडर्स उनकी ट्रेनिंग दिल्ली में भी करवाएंगे। दिल्ली मुख्यालय जाकर नए जिलाध्यक्ष पार्टी की वर्किंग पैटर्न को सीखेंगे। यहां पर वे राहुल गांधी से भी मुलाकात करेंगे।


