हरदा जिले के ग्राम रिछाड़िया में 50 लाख रुपए की लागत से बना कचरा ट्रीटमेंट प्लांट 15 साल बाद भी अनुपयोगी पड़ा है। कचरे से खाद बनाने के उद्देश्य से यह प्लांट स्थापित किया गया था, लेकिन राजनीतिक खींचतान के कारण जनता के पैसों की बर्बादी हुई। अब इस स्थान पर फायर स्टेशन बनाने की योजना है। भाजपा पार्षद मनोज महलवार ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन कांग्रेस परिषद ने बिना किसी योजना के जल्दबाजी में 15 वर्ष पहले यह प्लांट स्थापित कर दिया था। समय के साथ पूरा प्लांट कबाड़ में बदल गया। उन्होंने यह भी बताया कि नियमानुसार कचरा ट्रीटमेंट प्लांट वहीं लगाया जाता है जहां कचरा फेंका जाता है, जबकि हरदा का कचरा खेड़ीपुरा के पास फेंका जा रहा है और प्लांट वहां से लगभग आठ किलोमीटर दूर स्थापित किया गया था। भाजपा पार्षदों ने मांग की है कि जनता के टैक्स से बने इस प्लांट को गलत स्थान पर लगाकर राशि बर्बाद करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उस वक्त जिला प्रशासन की स्वीकृति के बाद ही प्लांट लगाया गया था और परिषद में भाजपा के सभी पार्षदों ने भी सहमति दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित परिषदों की अक्षमता के कारण यह प्लांट शुरू नहीं हो पाया। नगर पालिका के सीएमओ कमलेश पाटीदार ने बताया कि जिस स्थान पर यह प्लांट लगा था, अब वहां एक फायर स्टेशन बनाया जाएगा। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हेमंत टाले ने जानकारी दी कि 2010 में ग्राम रिछाड़िया के पास कचरा प्रबंधन प्लांट शुरू किया गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे रोक दिया गया। इसका परिणाम यह है कि आज भी लोग कचरे के धुएं, दुर्गंध और भूजल प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं।


