पन्ना के जज राजाराम भारती के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की, उससे रिटायरमेंट के अंतिम समय में फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सामने आए तथ्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि राजाराम का निलंबन किसी एक आदेश या अचानक लिए गए फैसले का परिणाम नहीं था। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ आई शिकायतों की पहले विधिवत और गोपनीय जांच कराई। सूत्रों के अनुसार, यह जांच किसी बाहरी एजेंसी को नहीं, बल्कि एक अन्य प्रधान जिला न्यायाधीश को सौंपी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद हाई कोर्ट की फुल कोर्ट बैठक में निलंबन का आदेश जारी हुआ। जज राजाराम को 19 नवंबर 2025 को निलंबित किया गया था, जबकि 30 नवंबर को उनका रिटायरमेंट था। यानी उन्हें रिटायरमेंट से 11 दिन पहले निलंबित किया गया। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनका मुख्यालय बदला गया। इस आदेश को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, पर राहत नहीं मिली। जज राजाराम की ओर से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट विपिन सांघी ने कहा कि निलंबन आदेश में कोई कारण नहीं बताया गया है। ये दलील भी दी कि गलत आदेश देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस आदेश को ऊपरी अदालत में सुधारा भी जा सकता है। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि अगर कोई आदेश साफ तौर पर बेईमानी या किसी गलत उद्देश्य से दिया गया हो, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकती? रिटायरमेंट से जुड़ा पूरा संदर्भ : राजाराम ने 1994 में न्यायिक सेवा जॉइन की थी। वर्ष 2009 में वे अतिरिक्त जिला न्यायाधीश व 2022 में प्रधान जिला न्यायाधीश बने। वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के चलते मध्य प्रदेश में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष कर दी गई। इसके कारण उनका रिटायरमेंट एक साल आगे बढ़ गया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि विवादित आदेश पारित करते समय उन्हें सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाए जाने की जानकारी नहीं थी। शीर्ष कोर्ट ने भारती के संदर्भ में ये दो सवाल उठाए 1 हाई कोर्ट की जगह सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए?
शीर्ष कोर्ट ने सवाल उठाया कि निलंबन के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय संबंधित अधिकारी ने हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।
जज राजाराम की ओर से बताया गया कि निलंबन का फैसला फुल कोर्ट का था, इसलिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। 2 आरटीआई पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई कि जज राजाराम ने निलंबन का कारण जानने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन किया। कोर्ट ने कहा कि एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से यह अपेक्षा नहीं की जाती। उन्हें हाई कोर्ट के समक्ष अभ्यावेदन देना चाहिए था। आगे क्या… सुप्रीम कोर्ट ने राजाराम भारती को हाई कोर्ट के समक्ष निलंबन के खिलाफ अभ्यावेदन देने की छूट दी है। हाई कोर्ट को इस अभ्यावेदन पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेना होगा।


