राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के एक रिटायर्ड मुख्य अभियंता(चीफ इंजीनियर) पर डेढ़ लाख का जुर्माना लगाया हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएम श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह जुर्माना रिटायर मुख्य अभियंता की जनहित याचिका को खारिज करते हुए लगाया। अदालत ने याचिका को स्वार्थ प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। याचिका में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) के संयुक्त उद्यम (JV) को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में उनके अनुभव के आधार पर यह संयुक्त उद्यम भविष्य में बिजली की महंगी दरों की ओर ले जाएगा, जो जनहित के खिलाफ है। याचिकाकर्ता का दावा काल्पनिक
अदालत ने कहा कि यह संयुक्त उद्यम छबड़ा थर्मल पावर प्लांट के आसपास कई परियोजनाओं को लागू करने के उद्देश्य से किया गया हैं। जिससे अतिरिक्त उत्पादन इकाइयां स्थापित की जा सकें, प्रभावशीलता बढ़े और उत्पादन लागत घटे। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह आग्रह कि इस स्तर पर भविष्य की उत्पादन और आपूर्ति दरों के संबंध में न्यायिक हस्तक्षेप किया जाए। केवल इस आधार पर कि वह बिजली विभाग में अभियंता रहे हैं, स्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने केवल अपनी कल्पना के आधार पर यह दावा किया है कि इस तरह की व्यवस्था से उत्पादन लागत बढ़ सकती है। कर्मचारी संघों से प्रेरित याचिका
अदालत ने कहा कि दर निर्धारण कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनकी जांच इस न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यह जनहित याचिका कुछ कर्मचारी संघों के हित को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रेरित लगती है, जो इस संयुक्त उद्यम का विरोध कर रहे हैं जैसा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध अभ्यावेदनों से स्पष्ट है। इस पृष्ठभूमि में न्यायालय ने कहा कि यह जनहित याचिका न्यायालय के समय और संसाधनों की बर्बादी है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसलिए इसे उदाहरणात्मक जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए। पहले से जमा 50,000 की सुरक्षा राशि के अलावा अदालत ने याचिकाकर्ता पर एक लाख अतिरिक्त जुर्माना लगाया और याचिका को खारिज कर दिया।


