रिम्स की जमीन पर कब्जा कर खेती करा रहे विधायक, बना अपार्टमेंट भी

झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स की अव्यवस्था को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रिम्स की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को 72 घंटे के दौरान हटाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दैनिक भास्कर ने रिम्स की जमीन पर किए गए अतिक्रमण की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई है। बड़गाई अंचल की रिपोर्ट को माने तो रिम्स को दी गई करीब पांंच एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। कब्जा करने वालों में छोटे लोग नहीं है। अधिकतर लोग रसूखदार और पैसे वाले हैं। इसी वजह से रिम्स प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक मौन रहा। रिम्स की जमीन पर सबसे अधिक कब्जा डीआईजी ग्राउंड के चारों ओर है। डीआईजी ग्राउंड के चारों ओर करीब दस घर व धार्मिक स्थल बन गए हैं। सबसे बड़ी बात है कि विधायक रामेश्वर उरांव भी रिम्स की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। बड़गाई अंचल की जांच रिपोर्ट को माने तो विधायक द्वारा जमीन पर कब्जा करके खेती कराई जा रही है। डीआईजी ग्राउंड के आगे रिम्स की जमीन पर चार मंजिला अपार्टमेंट बन गया है। अपार्टमेंट भी एक दिन में नहीं बना। पिछले कई वर्षों से इसका निर्माण हो रहा है। रिम्स प्रबंधन द्वारा पिछले चार साल से अपार्टमेंट बनाने वाले को नोटिस दिया जा रहा है। लेकिन रिम्स प्रबंधन ने इसका निर्माण नहीं रोका न प्रशासन ने रोक लगाई। इसके रिम्स के आगे स्थित तालाब के सामने वाली गली में भी एक दर्जन से अधिक घर बन गए हैं। रिम्स के सामने बरियातू थाना के आसपास भी अतिक्रमण कर लिया गया है।
गरीबों के घर तोड़ने का आदेश, अवैध अपार्टमेंट का क्यों नहीं
शहर के बीच में स्थित रिम्स को दी गई जमीन पर चार मंजिला अपार्टमेंट बन गया लेकिन नगर निगम ने कोई रोक-टोक नहीं की। निगम ने अवैध निर्माण का केस भी दर्ज नहीं किया। ऐसे में निगम की कार्यशैली पर ही सवाल खड़ा होता है। क्योंकि, गरीबों के घर की बात हो तो निगम अवैध निर्माण का केस दर्ज करके उसे तोड़ने का आदेश दे देता है। रसूखदार अवैध निर्माण कर लेते हैं तो निगम बिल्डिंग सील करता है,लेकिन बाद में उसे खोल भी देता है। लेकिन अतिक्रमण करके अपार्टमेंट बनने की सूचना निगम को नहीं मिलती है। नोटिस पर नोटिस, फिर भी नहीं रुका निर्माण सबसे अधिक कब्जा डीआईजी ग्राउंड के चारों ओर, 10 घर व धा​र्मिक स्थल बने रिम्स की जमीन पर बन रहे अपार्टमेंट को प्रशासन पिछले चार साल से नोटिस भेज रहा है। अंचल द्वारा दिए गए नोटिस के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा। देखते ही देखते चार मंजिला अपार्टमेंट बनकर तैयार हो गया। सबसे मजेदार बात है कि अपार्टमेंट बनाने वाले से जब जमीन के कागजात की मांग की गई तो प्रस्तुत कागजात भी रिम्स की जमीन का निकला। निर्माण करने वाले ने मोरहाबादी मौजा का कागज प्रस्तुत किया,जबकि अपार्टमेंट का निर्माण कोकर मौजा में किया गया है। दोनों कागजात जिस जमीन के थे वह जमीन भी रिम्स की निकली।

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