रिम्स के शिशु शल्य विभाग में एक साल में हुई 1456 सर्जरी

देश भर में 29 दिसंबर को नेशनल पीडियाट्रिक सर्जरी डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यह है कि लोगों को इस बारे में जागरूक किया जाए कि बच्चों की सर्जरी से संबंधित अलग विशेषज्ञ चिकित्सक होते हैं। सर्जरी के लिए उन्हें शिशु शल्य चिकित्सक के पास लेकर जाना चाहिए। रिम्स पीडियाट्रिक विभाग के हेड डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि रिम्स के इस विभाग में हर साल 1500 छोटे से बड़े ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं। साल 2024 में कुल 1456 सर्जरी हुई है। इसमें सबसे छोटे तीन दिन के बच्चे से लेकर 14 साल तक के बच्चों की सर्जरी शामिल है। हर महीने औसतन करीब 150 से अधिक ऑपरेशन किए जाते हैं। इसमें बच्चों के कैंसर के ही करीब दस सफल ऑपरेशन शामिल हैं। इन सर्जरी को कराने के लिए राज्य के अलावा दूसरे राज्यों से भी मरीज पहुंचते हैं। डॉ. अभिषेक ने बताया कि कई बार अभिभावकों को पता ही नहीं होता कि शिशुओं के ऑपरेशन के लिए अलग विभाग होता है, अलग विशेषज्ञ होते हैं। ऐसे में कई बार उनको काफी परेशान होने के बाद जनरल सर्जन से होते हुए हमारे विभाग तक पहुंचते हैं। जन्म के समय होने वाली परेशानियों का तत्काल इलाज कर देने से परेशानी काफी हद तक दूर हो जाती है और बच्चे समान्य जीवन जी पाते हैं। आंत और पेट की समस्या के सबसे अधिक परेशानी : पीडियाट्रिक सर्जरी में अमूमन वैसे बच्चे पहुंचते हैं जिनके पेट में और आंत में परेशानी होती है। डॉ. अभिषेक ने बताया कि मलाशय का रास्ता तैयार नहीं हो पाता है, उनकी सर्जरी की जाती है। आंत खुलने, आंत छाती में चले जाने, पेशाब का रास्ते में परेशानी होने की समस्या के साथ बच्चे ऑपरेशन के लिए पहुंचते हैं, जिनकी सफल सर्जरी की जाती है। नेशनल पीडियाट्रिक सर्जरी डे

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *